Ideal mother
माँ की संतान को शिक्षा
नौनिहालों की उन्नति हेतु उनमें प्राण फूंकने की कला बच्चों का मन बड़ा कोमल और ग्रहण शील होता है । उस आयु में पड़नेवाले संस्कार अमिट हो जाते हैं । बड़े हो जाने के बाद इन संस्कारों को बदलना या Read more…
नौनिहालों की उन्नति हेतु उनमें प्राण फूंकने की कला बच्चों का मन बड़ा कोमल और ग्रहण शील होता है । उस आयु में पड़नेवाले संस्कार अमिट हो जाते हैं । बड़े हो जाने के बाद इन संस्कारों को बदलना या Read more…
बचपन के संस्कार ही जीवन का मूल सन् १८९३ में गोरखपुर (उ.प्र.) में भगवती बाबू एवं ज्ञान प्रभा देवी के घर एक बालक का जन्म हुआ, नाम रखा गया मुकुंद । मुकुंद के माता-पिता ब्रह्मज्ञानी महापुरुष योगी श्यामाचरण लाहिड़ी जी Read more…
प्यार से पोषण करें सदगुणों का महात्मा हरिद्रुमत गांधार देश की ओर जा रहे थे । मार्ग में एक ऐसा गाँव पड़ा जहाँ सभी लोग बूढ़े, जवान, स्त्रियाँ और बच्चे भी भगवान को प्रेम करने वाले, भगवान की भक्ति करने Read more…
बालकों में संस्कार-सिंचन में क्यों रहें सतर्क कुछ माता-पिता अपने बच्चे को खूब लाड़-लड़ाते हैं वे सोचते हैं कि बेटे को बढ़िया स्कूल में पढ़ायेंगे, पायलट बनायेंगे । इसके लिए बच्चे को छात्रावास में भी रखते हैं किंतु बच्चा ऐसा Read more…
बच्चों को सुसंस्कृत बनाने में मां का योगदान मनुष्य का बचपन वह दर्पण है जिसमें उसके भावी व्यक्ति को देखने की झलक मिल जाती है । विश्व के महापुरुषों की जीवनी से यह स्पष्ट झलकता है कि उनका बाल्यकाल किस Read more…
सम्पन्न घरों के कुशाग्र बच्चों की ऐसी दुर्दशा क्यों ? अमेरिकन विश्वप्रसिद्ध साहित्यकार मार्क ट्वेन का चौंकाने वाला खुलासा हर माँ-बाप चाहते हैं कि उनके बच्चे बड़े होकर उनके परिवार का नाम रोशन करने वाले बनें लेकिन ऐसी कौन सी Read more…
जब-जब प्रगटे संत जन… मानव जीवन का परम लक्ष्य आत्मिक शांति पाना है । जो लोग इस परम लक्ष्य तक पहुंच जाते हैं उसी में रमण करते हैं जिनके लिए अन्य कोई कर्तव्य शेष नहीं रह जाता जिनका प्रागट्य मात्र Read more…
सेवाभाव से घर में प्रकटाये महान संत सिंध प्रदेश के हैदराबाद जिले में सिंधु नदी के तट पर बसे खंडू गाँव में भक्त चेलाराम जी रहते थे । वे इतने संतसेवी थे कि कहीं भी किन्हीं सत्पुरुष, महात्मा को देखते Read more…
मातायें कैसे करें देश की सेवा ? माताएं अपने देश, समाज, कुल की जितनी सेवा कर सकती हैं उतनी सेवा दूसरा कोई नहीं कर सकता क्योंकि बच्चे माता के पास ज्यादा रहते हैं । माता उनके लिए रसोइए का काम Read more…
माँ के संस्कारों व गुरुकृपा से नरेन्द्र बने स्वामी विवेकानंद संतान पर माता-पिता के संग और गुण-अवगुण का बड़ा गहरा प्रभाव पड़ता है । पूरे परिवार में माँ के जीवन और उसकी शिक्षा का संतान पर सर्वाधिक प्रभाव पड़ता है Read more…