भारतीय संस्कृति के आधारभूत तथ्य – 2

भारतीय संस्कृति के आधारभूत तथ्य छः –  षड् दर्शन : सांख्या, योग, न्याय, वैशेषिक, पूर्व मीमांसा, उत्तर मीमांसा (वेदांत) । षड् ऋतुएं : वसंत, ग्रीष्म, वर्षा, शरद, शिशिर, हेमंत । षट्सम्पत्ति : शम, दम, तितिक्षा, उपरति, श्रद्धा, समाधान । सात Read more…

भारतीय संस्कृति के आधारभूत तथ्य – 3

भारतीय संस्कृति के आधारभूत तथ्य एकादश रुद्र –   कपाली पिंगलो भीमो विरूपाक्षो विलोहितः। अजक शासनः शास्ता शम्भूचन्डो भवस्था।। कपाली, पिंगल, भीम, विरुपाक्ष, विलोहित, अजक, शासन, शास्ता, शम्भू, चण्ड और भवः। बारह –  बारहखड़ी: देवनागरी वर्णमाला के 12 स्वर- अ, आ, Read more…

अपानवायु मुद्रा

अपानवायु मुद्रा विधि – अँगूठे के पास वाली पहली उँगली को अँगूठे के मूल में लगाकर अँगूठे के अग्रभाग की बीच की दोनों उँगलियों के अग्रभाग के साथ मिलाकर सबसे छोटी उँगली (कनिष्ठिका) को अलग से सीधी रखें। इस स्थिति को अपानवायु मुद्रा कहते Read more…

वायु मुद्रा

वायु मुद्रा विधि – तर्जनी अर्थात प्रथम उँगली को मोड़कर ऊपर से उसके प्रथम पोर पर अँगूठे की गद्दी स्पर्श कराओ। शेष तीनों उँगलियाँ सीधी रहें। लाभः हाथ-पैर के जोड़ों में दर्द, लकवा, पक्षाघात, हिस्टीरिया आदि रोगों में लाभ होता है। इस मुद्रा के साथ Read more…

प्राण मुद्रा

प्राण मुद्रा विधि – कनिष्ठिका, अनामिका और अँगूठे के ऊपरी भाग को परस्पर एक साथ स्पर्श करायें। शेष दो उँगलियाँ सीधी रहें। लाभः यह मुद्रा प्राण शक्ति का केंद्र है। इससे शरीर निरोगी रहता है। आँखों के रोग मिटाने के लिए व चश्मे का नंबर Read more…

वरुण मुद्रा

वरुण मुद्रा विधि – मध्यमा अर्थात सबसे बड़ी उँगली के मोड़ कर  उसके नुकीले भाग को अँगूठे के नुकीले भाग पर स्पर्श करायें। शेष तीनों उँगलियाँ सीधी रहें। लाभः यह मुद्रा करने से जल तत्त्व की कमी के कारण होने वाले रोग जैसे Read more…

ज्ञान मुद्रा

ज्ञान मुद्रा प्रातः स्नान आदि के बाद आसन बिछा कर हो सके तो पद्मासन में अथवा सुखासन में बैठें। पाँच-दस गहरे साँस लें और धीरे-धीरे छोड़ें। उसके बाद शांतचित्त होकर निम्न मुद्राओं को दोनों हाथों से करें। विशेष परिस्थिति में Read more…

सूर्यमुद्रा

सूर्यमुद्रा   प्रातः स्नान आदि के बाद आसन बिछा कर हो सके तो पद्मासन में अथवा सुखासन में बैठें। पाँच-दस गहरे साँस लें और धीरे-धीरे छोड़ें। उसके बाद शांतचित्त होकर निम्न मुद्राओं को दोनों हाथों से करें। विशेष परिस्थिति में Read more…

पृथ्वी मुद्रा

पृथ्वी मुद्रा प्रातः स्नान आदि के बाद आसन बिछा कर हो सके तो पद्मासन में अथवा सुखासन में बैठें। पाँच-दस गहरे साँस लें और धीरे-धीरे छोड़ें। उसके बाद शांतचित्त होकर निम्न मुद्राओं को दोनों हाथों से करें। विशेष परिस्थिति में Read more…