Yogasan
ताड़ासन
ताड़ासन क्या आप अपनी लम्बाई बढ़ाना चाहते हैं? अपनी ऊर्जाशक्ति को ऊर्ध्वगामी बनाना चाहते हैं? हाँ तो आप नित्य ताड़ासन का अभ्यास कीजिए। परिचयः इस आसन में शरीर की स्थिति ताड़ या खजूर के वृक्ष के समान लम्बी होती है, Read more…
ताड़ासन क्या आप अपनी लम्बाई बढ़ाना चाहते हैं? अपनी ऊर्जाशक्ति को ऊर्ध्वगामी बनाना चाहते हैं? हाँ तो आप नित्य ताड़ासन का अभ्यास कीजिए। परिचयः इस आसन में शरीर की स्थिति ताड़ या खजूर के वृक्ष के समान लम्बी होती है, Read more…
शवासन क्या आप अपनी मनःशक्ति को बढ़ाना चाहते हैं ? हाँ तो आप नित्य शवासन का अभ्यास कीजिए। परिचयः इस आसन की पूर्णावस्था में शरीर की स्थिति मृतक व्यक्ति जैसी हो जाती है, अतः इसे शवासन कहते हैं। लाभः अन्य Read more…
सद्गुरु-स्तुति हे सदगुरु तुम परम हितैषी, तुमसे ही कल्याण हमारा | तुम्हें न पाकर व्यर्थ चला जाता, मानव का जीवन सारा | परम सत्य, हे नित्य युक्त, हे शुद्ध बुद्ध, हे मुक्त महात्मन् | मन दे पाये जो तुमको ही, Read more…
आरोग्य के मूलभूत सिद्धांत दिवाशयन निशि जागरण, विषमाहार विहार । वेगावेग निरुद्धि से, बने रोग आधार ॥ पीवे अंजलि अष्ट जल, सूर्योदय के पूर्व । वात पित्त होवे शमन, उपजे शक्ति अपूर्व ॥ ग्रीष्म वात संचय करे, वर्षा पित्तज स्राव Read more…
कितने दिन ? मानव सोचो जग के सुख का, विस्तार रहेगा कितने दिन | सत्कार रहेगा कितने दिन, यह प्यार रहेगा कितने दिन || चाहे पितु हो या माता हो, पत्नी हो सुत या भ्राता हो | जिसको अपना कहते Read more…
अपने स्वरूप को जानो शुभ अवसर है तो यह है, जो चाहो लाभ उठाओ । यह व्यर्थ न जाने पाये, निज को निर्दोष बनाओ ।। सत्संग से गति मिलती, हितकर पुनीत मति मिलती। सद्गुरु विवेक मिल जाता, उसको न कही Read more…
तुम बुद्धिमान मानव जागो शुभ अवसर बीते जाते हैं, तुम बुद्धिमान मानव जागो । अविवेकी देर लगाते है, तुम बुद्धिमान मानव जागो ।। वह महादुःखद अज्ञान निशा, जिसमें न सूझती सत्य दिशा । इसको सब समझ ना पाते है, तुम Read more…
तुम हो पथिक साधना पथ में… तुम हो पथिक साधना पथ में, समझ–समझकर पैर बढ़ाना । अविनाशी के सम्मुख होकर, नश्वर में मत प्रीति फंसाना ।। दृढ़ संकल्प और साहस के साथ, प्रेम को पूर्ण बनाकर । आकृति नहीं किंतु Read more…
न भूलो परमेश्वर का ध्यान न भूलो परमेश्वर का ध्यान, यही तो अपने जीवन के प्राण ।। यह सब संगी कुछ ही दिन के, तुम चल रहे भरोसे जिनके । समझकर यह संभ्रम अज्ञान, न भूलो परमेश्वर का ध्यान ।।… Read more…
प्रभो अपने मन में बसाऊं तुम्हींको… प्रभो अपने मन में बसाऊं तुम्हींको । हृदय में हृदय धन बिठाऊं तुम्हींको ।। यही एक स्वीकार मेरी विनय हो । विमल हो मलिन मन सदा ध्यान लय हो ।। तुम्हींमें हमारा ये जीवन Read more…