परस्पर भावयन्तु…

लूट मची, खुशहाली छायी एक धनी सेठ के सात बेटे थे । छः का विवाह हो चुका था । सातवीं बहू आयी, वह सत्संगी माँ-बाप की बेटी थी । बचपन से ही सत्संग में जाने से सत्संग के सुसंस्कार उसमें Read more…

छोटी बहू

शोषण नहीं पोषण करें प्राचीनकाल में हिम्मतनगर (गुजरात) से आगे रतनपुर नगर में रामराय नाम का एक धनवान सेठ रहता था । एक दिन उसने सोचा, ‘मेरे पास इतनी धन-सम्पत्ति है, राजा साहब यह सम्पत्ति देखें तो उनको भी पता Read more…

घर-परिवार को कैसे रखें खुशहाल ?

घर-परिवार को कैसे रखें खुशहाल ? आजकल की महिलाएँ झगड़े के पिक्चर, नाटक देखती सुनतीं हैं, गाने गाती हैं- ‘इक दिल के टुकड़े हजार हुए, कोई यहाँ गिरा कोई वहाँ गिरा’ तथा भोजन भी बनाती जाती हैं । अब जिसके Read more…

कैसे करें बुद्धि और कर्म का समन्वय

बुद्धि और कर्म का समन्वय योग माने कर्मयोग और सांख्य माने विचार । बुद्धि व कर्म दोनों हमारे साथ रहने चाहिए । यदि हम केवल विचार ही करते रह जायें और काम न करें तो बुद्धि व्यर्थ चली जाती है Read more…

पतिव्रता का सामर्थ्य

सेवा कैसी हो ? श्री जयदयाल गोयंदकाजी अपने प्रवचन में एक कथा बताते थेः एक स्त्री अपनी पड़ोसन के यहाँ गयी तो उस समय वह धान कूट रही थी । इसी बीच उसके पति ने बाहर से आवाज दीः “दरवाजा Read more…

दोष-दर्शन नहीं देव-दर्शन

दोष-दर्शन नहीं देव-दर्शन एक माई ने अपने बेटे की निन्दा की एवं बहन ने अपने भाई की निन्दा की उसकी धर्मपत्नी के सामने, जो अभी-अभी शादी करके आयी थी । बहन बोलीः “मेरे भाई का नाम तो तेजबहादुर है । Read more…

कैसा हो पतिव्रता में त्याग और साहस

त्याग और साहस प्रसिद्ध वैज्ञानिक श्री जगदीशचन्द्र बसु कलकत्ता में विज्ञान का गहन अध्ययन तथा शोधकार्य कर रहे थे, साथ ही एक महाविद्याल में पढ़ाते भी थे । उसी महाविद्यालय में कुछ अंग्रेज प्राध्यापक भी विज्ञान पढ़ाते थे । उनका Read more…

माँ बनो तो ऐसी…

माँ बनो तो आदर्श माता मदालसा जैसी मदालसा देवी कहती हैं – “एक बार जो मेरे उदर से गुजरा व यदि दूसरी स्त्री के उदर में जाय, मुक्त न होकर दूसरा जन्म ले तो मेरे गर्भधारण को धिक्कार है !” वे जब Read more…

माँ अंजना का सामर्थ्य

माँ अंजना का सामर्थ्य माँ अंजना ने तप करके हनुमान जैसे पुत्र को पाया था । वे हनुमानजी में बाल्यकाल से ही भगवदभक्ति के संस्कार डाला करती थीं, जिसके फलस्वरूप हनुमानजी में श्रीराम-भक्ति का प्रादुर्भाव हो गया । आगे चलकर Read more…

दुर्गादास की वीर जननी

दुर्गादास की वीर जननी सन् 1634 के फरवरी मास की घटना हैः जोधपुर नरेश का सेनापति आसकरण जैसलमेर जिले से गुजर रहा था । जेमल गाँव में उसने देखा कि गाँव के लोग डर के मारे भागदौड़ मचा रहे हैं Read more…