Vastu tips
ईशान- स्थल की महत्ता
ईशान- स्थल की महत्ता कमरे की पूर्वी दीवाल की लम्बाई का एक तिहाई भाग व उत्तरी दीवाल की लम्बाई का एक तिहाई भाग लेकर जो आयताकार स्थल बनता है, वह ‘ईशान- स्थल” कहलाता है (चित्र देखें) | 12/ 18 के Read more…
ईशान- स्थल की महत्ता कमरे की पूर्वी दीवाल की लम्बाई का एक तिहाई भाग व उत्तरी दीवाल की लम्बाई का एक तिहाई भाग लेकर जो आयताकार स्थल बनता है, वह ‘ईशान- स्थल” कहलाता है (चित्र देखें) | 12/ 18 के Read more…
नैऋत्य स्थल की महत्ता ईशान रखें नीचा, नैऋत्य रखें ऊँचा । यदि चाहते हो वास्तु से अच्छा नतीजा ।। किसी भी वास्तु में ईशान के समान महत्ता रखनेवाला दूसरा स्थल है ‘नैऋत्य स्थल’ | कमरे अथवा भूमिखंड की दक्षिणी व Read more…
पारिवारिक एकता हेतु महत्वपूर्ण : ब्रह्मस्थान भूखंड को लम्बाई व चौड़ाई में आठ- आठ समान भागों में विभक्त करने से बननेवाले ६४ आयतों में से केंद्रीय ४ आयतो से बना भूभाग ‘ब्रह्मस्थान’ (ब्रह्मस्थल) कहलाता है । जिस तरह शरीर में Read more…
वसंत ऋतुचर्या वसंत ऋतु की महिमा के विषय में कवियों ने खूब लिखा है। गुजराती कवि दलपतराम ने कहा हैः रूडो जुओ आ ऋतुराज आव्यो। मुकाम तेणे वनमां जमाव्यो ।। अर्थात् Read more…
वसन्त ऋतु में आहार-विहार आहार – इस ऋतु में कफ को कुपित करने वाले पौष्टिक और गरिष्ठ पदार्थों की मात्रा धीरे-धीरे कम करते हुए गर्मी बढ़ते हुए ही बन्द कर के सादा सुपाच्य आहार लेना शुरु कर देना चाहिए । चरक के सादा Read more…
ग्रीष्मजन्य व्याधियों के उपाय सर्वांग दाह : शतावरी चूर्ण (२ से ३ ग्राम) अथवा शतावरी कल्प (१चम्मच) दूध में लाकर सुबह खाली पेट लें । आहार में दूध-चावल अथवा दूध-रोटी लें । आश्रम द्वारा निर्मित रसायन चूर्ण तथा आवला Read more…
वर्षा ऋतुचर्या वर्षा ऋतु में वायु का विशेष प्रकोप तथा पित्त का संचय होता है। वर्षा ऋतु में वातावरण के प्रभाव के कारण स्वाभाविक ही जठराग्नि मंद रहती है, जिसके कारण पाचनशक्ति कम हो जाने से अजीर्ण, बुखार, वायुदोष का Read more…
शरद ऋतुचर्या भाद्रपद एवं आश्विन ये शरद ऋतु के दो महीने हैं। शरद ऋतु स्वच्छता के बारे में सावधान रहने की ऋतु है अर्थात् इस मौसम में स्वच्छता रखने की खास जरूरत है।रोगाणाम् शारदी माताः।अर्थात् शरद ऋतु रोगों की माता Read more…
शीत ऋतुचर्या शीत ऋतु के अंतर्गत हेमंत और शिशिर ऋतु आते हैं। यह ऋतु विसर्गकाल अर्थात् दक्षिणायन का अंतकाल कहलाती है। इस काल में चन्द्रमा की शक्ति सूर्य की अपेक्षा अधिक प्रभावशाली होती है। इसलिए इस ऋतु में औषधियाँ, वृक्ष, Read more…
हेमन्त और शिशिर की ऋतुचर्या शीतकाल आदानकाल और विसर्गकाल दोनों का सन्धिकाल होने से इनके गुणों का लाभ लिया जा सकता है क्योंकि विसर्गकाल की पोषक शक्ति हेमन्त ऋतु हमारा साथ देती है। साथ ही शिशिर ऋतु में आदानकाल शुरु Read more…