भ्रामरी प्राणायाम

भ्रामरी प्राणायाम स्मरणशक्ति और बौद्धिक शक्ति बढ़ाने हेतु नित्य  भ्रामरी प्राणायाम का अभ्यास चाहिए  । परिचयः  स्मरणशक्ति तथा बौद्धिक शक्तियों को विकसित करने के लिए यह सर्वसुलभ व बहु-उपयोगी प्राणायाम है । इस प्राणायाम में भ्रमर अर्थात् भँवरे की तरह Read more…

संस्कृति रक्षक प्राणायाम

संस्कृति रक्षक प्राणायाम गहरा श्वास लेकरर ॐकार का जप करें, आखिर में ‘म’ को घंटनाद की नाईं गूँजने दें। ऐसे 11 प्राणायाम फेफड़ों की शक्ति बढ़ायेंगे, रोगप्रतिकारक शक्ति तो बढ़ायेंगे साथ ही वातावरण में भी भारतीय संस्कृति की रक्षा में Read more…

त्रिबन्ध प्राणायाम

त्रिबन्ध प्राणायाम ध्यान दें- विशेष ध्यान देने की बात है कि मूलबंध (गुदा का संकोचन करना), उड्डीयानबंध (पेट को अंदर की ओर सिकोड़कर ऊपर की ओर खींचना) एवं जालंधरबंध (ठोढ़ी को कंठकूप से लगाना) – इस तरह से त्रिबंध करके यह प्राणायाम करने Read more…

केवली कुम्भक प्राणायाम

केवली कुम्भक प्राणायाम केवल या केवली कुम्भक का अर्थ है रेचक-पूरक बिना ही प्राण का स्थिर हो जाना । जिसको केवली कुम्भक सिद्ध होता है उस योगी के लिए तीनों लोक में कुछ भी दुर्लभ नहीं रहता । कुण्डलिनी जागृत Read more…

जलनेति

जलनेति विधिः एक लिटर पानी को गुनगुना सा गरम करें । उसमें करीब दस ग्राम शुद्ध नमक डालकर घोल दें । सैन्धव मिल जाये तो अच्छा । सुबह में स्नान के बाद यह पानी चौड़े मुँहवाले पात्र में, कटोरे में Read more…

गजकरणी

गजकरणी विधिः करीब दो लिटर पानी गुनगुना सा गरम करें । उसमें करीब 20 ग्राम शुद्ध नमक घोल दें । सैन्धव मिल जाये तो अच्छा है । अब पंजों के बल बैठकर वह पानी गिलास भर-भर के पीते जायें । Read more…

अग्निसार क्रिया

अग्निसार क्रिया अग्नाशय को प्रभावित करने वाली यह योग की प्राचीन क्रिया लुप्त हो गयी थी । घेरण्ड ऋषि पाचन-प्रणालि को अत्यधिक सक्रिय रखने के लिए यह क्रिया करते थे । इस क्रिया से अनेक लाभ साधक को बैठे-बैठे मिल Read more…

ब्रह्ममुद्रा

ब्रह्ममुद्रा ब्रह्ममुद्रा योग की लुप्त हुई क्रियाओं में से एक महत्त्वपूर्ण मुद्रा है । ब्रह्मा के तीन मुख और दत्तात्रेय के स्वरूप को स्मरण करते हुए व्यक्ति तीन दिशा में सिर घुमाये ऐसी यह क्रिया है अतः इस क्रिया को Read more…

स्थलबस्ती

ब्रह्मचर्य- रक्षा व १४० प्रकार की बीमारियों से सुरक्षा का उपाय : स्थलबस्ती सुबह खाली पेट दक्षिण या पूर्व की तरफ सिर करके सीधे लेट गये | श्वास बाहर निकाल दिया और मल- त्याग करने की इन्द्रिय (गुदा) का संकोचन- Read more…

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गौ- महिमा

गाय की महिमा और परम आवश्यकता गाय की महत्ता और आवश्यकता परमात्मा की अनुपम कृति व सनातन संस्कृति की अनमोल धरोहर है देशी गाय, जो मनुष्य को सभी प्रकार से पोषण देने व उन्नत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है Read more…