संयमनिष्ठ सुयशा

संयमनिष्ठ सुयशा अमदावाद की घटित घटना हैः विक्रम संवत् 17 वीं शताब्दी में कर्णावती (अमदावाद) में युवा राजा पुष्पसेन का राज्य था । जब उसकी सवारी निकलती तो बाजारों में लोग कतारबद्ध खड़े रहकर उसके दर्शन करते । जहाँ किसी Read more…

हरिभजन परायण कर्मठीबाई

हरिभजन परायण कर्मठीबाई राजस्थान के बागर ग्राम में पुरुषोत्तम ब्राह्मण की इकलौती बेटी थी कर्मठी बाई । वह विवाह नहीं करना चाहती थी परंतु ‘लोग क्या कहेंगे’ – इस डर से माँ-बाप ने उसको धकेल दिया संसार के भोग-विलास से Read more…

संत अवैय्यार

संत-वाणी से सहजो बनी महान दिल्ली के परीक्षितपुर नामक स्थान में 25 जुलाई 1725 को चार भाइयों के बाद एक कन्या जन्मी । उसका नाम था सहजो । कन्या के पिता का नाम था हरि प्रसाद और माता का नाम Read more…

विजातीय परिचय की मर्यादा

विजातीय परिचय की मर्यादा व्यवहारिक क्षेत्र में स्त्री-पुरुष के बीच संपर्क केवल आवश्कता के मुताबिक ही होना चाहिये । साधारण स्तर पर स्त्री के लिए पुरुष के शरीर को और पुरुष के लिए स्त्री के शरीर को स्पर्श करना बिल्कुल Read more…

माँ सीता का सतीत्व

माँ सीता का सतीत्व भगवान श्रीराम के वियोग तथा रावण और राक्षसियों के द्वारा किये जानेवाले अत्याचारों के कारण माँ सीता अशोक वाटिका में बड़ी दुःखी थीं । न तो वे भोजन करतीं न ही नींद । दिन-रात केवल श्रीराम-नाम Read more…

संस्कृत क्यों आवश्यक

संस्कृत क्यों आवश्यक संस्कृत अति प्रवीन व समृद्ध भाषा है । इस पर हो रहे शोधों से इसकी महानता व आवश्यकता विश्व के सामने प्रकट हो रही है । अमेरिका के न्यूरो साइंटिस्ट डॉ. जेम्स हार्टजेल ने संस्कृत पर गहन Read more…

सफलता की कुंजियाँ

सफलता की कुंजियाँ सुबह नींद में से उठते ही क्या करना चाहिए ? बल ही जीवन है, दुर्बलता मौत है और सब बलों का मूल स्थान आत्मा-परमात्मा है । इसलिए सुबह नींद में से उठ के किसका ध्यान करोगे ? Read more…

पहले साइंस या पहले ईश्वर ?

पहले साइंस या पहले ईश्वर ? एक दिन श्रीरामकृष्ण परमहंस के दर्शन हेतु प्रसिद्ध विद्वान बंकिमचन्द्र चटर्जी पधारे थे । रामकृष्ण जी ने भक्तों को उपदेश देते हुए कहाः “कोई-कोई समझते हैं कि बिना शास्त्र पढ़े अथवा पुस्तकों का अध्ययन Read more…

सती सावित्री

सती सावित्री ‘महाभारत’ के वन पर्व में सावित्री और यमराज के वार्तालाप का प्रसंग आता हैः जब यमराज सत्यवान (सावित्री के पति) के प्राणों को अपने पाश में बाँध ले चले, तब सावित्री भी उनके पीछे-पीछे चलने लगी । उसे अपने Read more…