वीरांगना मलबाई

वो बहादुर नारी … दक्षिण भारत का एक छोटा-सा राज्य था बेल्लारी । उसका शासक कोई वीर पुरुष नहीं बल्कि शौर्य की प्रतिमा विधवा नारी मलबाई देसाई थीं । छत्रपति शिवाजी की सेना ने बेल्लारी पर चढ़ाई की । शिवाजी Read more…

राजकुमारी मल्लिय बनी तीर्थंकर मल्लियनाथ

राजकुमारी मल्लिका बनी तीर्थंकर मल्लियनाथ जैन धर्म में कुल 24 तीर्थंकर हो चुके है । उनमें एक राजकन्या भी तीर्थंकर हो गयी जिसका नाम था मल्लियनाथ । राजकुमारी मल्लिका इतनी खूबसरत थी कि कई राजकुमार व राजा उसके साथ ब्याह Read more…

कर्माबाई की वात्सल्य भक्ति

कर्माबाई की वात्सल्य-भक्ति सर्वान्तर्यामी, घट-घटवासी भगवान न तो धन-ऐश्वर्य से प्रसन्न होते हैं और न ही पूजा के लम्बे-चौड़े विधानों से । वे तो बस, एकमात्र प्रेम से ही संतुष्ट होते हैं एवं प्रेम के वशीभूत होकर नेम (नियम) की Read more…

आर्त भक्त द्रौपदी

आर्त भक्त द्रौपदी ईर्ष्या-द्वेष और अति धन-संग्रह से मनुष्य अशांत होता है । ईर्ष्या-द्वेष की जगह पर क्षमा और सत्प्रवृत्ति का हिस्सा बढ़ा दिया जाय तो कितना अच्छा !दुर्योधन ईर्ष्यालु था, द्वेषी था । उसने तीन महीने तक दुर्वासा ऋषि Read more…

आनंदीबाई की दृढ़ श्रद्धा

आनंदीबाई की दृढ़ श्रद्धा एक पंजाबी महिला का नाम था आनंदीबाई । देखने में तो वह इतनी कुरूप थी कि देखकर लोग डर जायें । उसका विवाह हो गया । विवाह से पूर्व उसके पति ने उसे नहीं देखा था Read more…

अद्भुत आभा संपन्न रानी कलावती

‘स्कन्द पुराण’ के ब्रह्मोत्तर खंड में कथा आती है कि ‘काशीनरेश की कन्या कलावती के साथ मथुरा के दाशार्ह नामक राजा का विवाह हुआ । विवाह के बाद राजा ने रानी को अपने पलंग पर बुलाया लेकिन उसने इन्कार कर दिया Read more…

भक्तिदात्री पाँच नारियाँ

‘श्रीमद्‌ भागवत’ में पाँच महान महिलाओं की बात आती है : पहली भक्त महिला है द्रौपदी । द्रौपदी भगवान को बोलती है : “प्रभु ! आपको मेरी सहायता में रहना ही पड़ेगा क्योंकि आप मेरे सखा हों, मेरे संबंधी हों, Read more…

Power of Silence

मौनः शक्तिसंचय का महान स्रोत मौन शब्द की संधि विच्छेद की जाय तो म+उ+न होता है । म= मन, उ = उत्कृष्ट और न = नकार । मन को संसार की ओर उत्कृष्ट न होने देना और परमात्मा के स्वरूप Read more…

Trataka

बाह्य धारणा (त्राटक) परमात्मा अचल, निर्विकार, अपरिवर्तनशील और एकरस हैं । प्रकृति में गति, विकार, निरंतर परिवर्तन है । मानव उस परमात्मा से अपनी एकता जानकर प्रकृति से पार हो जाये इसलिए परमात्म-स्वरूप के अनुरूप अपने जीवन में दृष्टि व Read more…

Omkar gunjan

ॐ कार का अर्थ एवं महत्त्व ॐ = अ+उ+म+(ँ) अर्ध तन्मात्रा । ॐ का अ कार स्थूल जगत का आधार है । उ कार सूक्ष्म जगत का आधार है । म कार कारण जगत का आधार है । अर्ध तन्मात्रा Read more…