शौच-विज्ञान

क्या है शौच-विज्ञान का रहस्य   शौच का अर्थ है शुद्धि। शुद्धि दो प्रकार की होती हैः आंतर शुद्धि और बाह्य शुद्धि। बाह्य शुद्धि तो साबुन,  उबटन, पानी से होती है और आंतर शुद्धि होती है राग, द्वेष, वासना आदि Read more…

पुण्यदायी स्नान

पुण्यदायी स्नान पाश्चात्य अंधानुकरण के प्रभाव से लोग स्नान की महत्ता भूलते जा रहे हैं। इससे तमोगुण की वृद्धि हुई है और लड़ाई-झगड़ा, अशांति आदि समस्याओं ने घर लिया है। समस्याओं से निजात दिलाने हेतु बापू जी ने स्नान की Read more…

तिलक लगाने के लाभ

तिलक और त्रिकाल संध्या ललाट पर दोनों भौहों के बीच विचार शक्ति का केन्द्र है । योगी इसे’आज्ञाचक्र’कहते हैं । इसे शिवनेत्र अर्थात् कल्याणकारी विचारों का केन्द्र भी कहा जाता है । ललाट पर तिलक करने से आज्ञाचक्र और उसके Read more…

भोजन के नियम क्यों आवश्यक

भोजन के नियम क्यों आवश्यक अधिकांश लोग भोजन की सही विधि नहीं जानते। गलत विधि से गलत मात्रा में अर्थात् आवश्यकता से अधिक या बहुत कम भोजन करने से या अहितकर भोजन करने से जठराग्नि मंद पड़ जाती है, जिससे Read more…

निद्रा और स्वास्थ्य

निद्रा और स्वास्थ्य जब आँख, कान, आदि ज्ञानेन्द्रियाँ और हाथ, पैर आदि कर्मेन्द्रियाँ तथा मन अपने-अपने कार्य में रत रहने के कारण थक जाते हैं, तब स्वाभाविक ही नींद आ जाती है। जो लोग नियत समय पर सोते और उठते Read more…

प्रसन्नता और हास्य

प्रसन्नता और हास्य प्रसादे सर्वदुःखानां हानिरस्योपजायते। प्रसन्नचेतसो ह्याशु बुद्धिः पर्यवतिष्ठते।। ‘अंतःकरण की प्रसन्नता होने पर उसके(साधक के) सम्पूर्ण दुःखों का अभाव हो जाता है और उस प्रसन्न चित्तवाले कर्मयोगी की बुद्धि शीघ्र ही सब ओर से हटकर एक परमात्मा में ही Read more…

नास्ति शिवरात्रि परात्परम्

नास्ति शिवरात्रि परात्परम् ‘स्कन्द पुराण’ में सूतजी कहते हैं- सा जिह्वा या शिवं स्तौति तन्मनो ध्यायते शिवम् । तौ कर्णौ तत्कथालोलौ तौ हस्तौ तस्य पूजकौ ।। यस्येन्द्रियाणि सर्वाणि वर्तन्ते शिवकर्मसु । स निस्तरति संसारे भुक्तिं मुक्तिं च विन्दति ।। ‘वही जिह्वा सफल Read more…

भगवान की प्रीति पाने का मासः माघ मास

भगवान की प्रीति पाने का मासः माघ मास ‘पद्म पुराण’ के उत्तर खण्ड में माघ मास के माहात्म्य का वर्णन करते हुए कहा गया है कि व्रत, दान व तपस्या से भी भगवान श्रीहरि को उतनी प्रसन्नता नहीं होती, जितनी Read more…

भारतीय संस्कृति की पूर्णता का प्रतीकः होलीकोत्सव

भारतीय संस्कृति की पूर्णता का प्रतीकः होलिकोत्सव होली भारतीय संस्कृति की पहचान का एक पुनीत पर्व है, भेदभाव मिटाकर पारस्परिक प्रेम व सद्भाव प्रकट करने का एक अवसर है । अपने दुर्गुणों तथा कुसंस्कारों की आहुति देने का एक यज्ञ Read more…

अवतरण दिवस अर्थात् विश्व सेवा-सत्संग दिवस

अवतरण दिवस अर्थात् विश्व सेवा-सत्संग दिवस प्रातःस्मरणीय पूज्य संत श्री आशारामजी बापू ऐसे महापुरुष हैं जिन्होंने अपने शिष्यों को भक्तियोग और ज्ञानयोग के साथ-साथ कर्मयोग भी सिखाया है । पूज्यश्री का कहना है कि कर्म करने की कला जान लो Read more…