माताएं अपने देश, समाज, कुल की जितनी सेवा कर सकती हैं उतनी सेवा दूसरा कोई नहीं कर सकता क्योंकि बच्चे माता के पास ज्यादा रहते हैं ।
माता उनके लिए रसोइए का काम करती है, शिक्षक का काम करती हैं, मित्र का काम करती हैं, उन की गंदगी साफ करने का काम भी करती हैं तो अनुशासन का काम भी माता ही करती हैं ।
बचपन के संस्कार संतान पर गहरा प्रभाव डालते हैं ।
इसीलिए भारत की माताएं अपने बच्चों में उत्तम संस्कार, सदाचार एवं संयम का सिंचन कर सके तो वह दिन दूर नहीं जिस दिन पूरे विश्व में भारतीय सनातन धर्म और संस्कृति की दिव्य पताका पुनः लहराएं ।