ऋषियों का कथन है की ब्रह्मचर्य ब्रह्म-परमात्मा के दर्शन का द्वार है, उसका पालन करना अत्यंत आवश्यक है । इसलिए यहाँ हम ब्रह्मचर्य-पालन के कुछ सरल नियमों एवं उपायों की चर्चा करेंगे :
ब्रह्मचर्य तन से अधिक मन पर आधारित है । इसलिए मन को नियंत्रण में रखें और अपने सामने ऊँचा आदर्श रखें ।
वीर्यरक्षण हेतु उपाय –
वीर्यवर्धक गुटिका
• तुलसी के बीजों के चूर्ण में समान मात्रा में गुड़ मिलाकर छोटे बेर जैसी गोलियाँ बना लें । सुबह- शाम एक- एक गोली लेकर ऊपर से गाय का दूध पीने से (इस तरह चार मास लेने से) नपुंसकता दूर होती है, वीर्य बढ़ता है, नसों में शक्ति आती है, पाचनशक्ति सुधरती है और कैसा भी निराश हुआ पुरुष पुनः सशक्त होता है । इस प्रयोग के साथ ‘दिव्य प्रेरणा प्रकाश’ (संत श्री आसारामजी आश्रम, साबरमती, अहमदाबाद- ५ द्वारा प्रकाशित) पुस्तक का अध्ययन करना आवश्यक है ।
• आँवला चूर्ण 80 भाग और हल्दी चूर्ण 20 भाग मिलाकर रात को सोते समय पानी के साथ लेना भी हितावह है । (आँवला चूर्ण लेने के 2 घंटे पूर्व व पश्चात् दूध न लें ।)