यह बात गाँठ बाँध लो, प्रेम तो उन लोगों में हो ही नहीं सकता, जो संयमहीन जीवन व्यतीत करते हैं ।
प्रत्येक पुरुष तथा स्त्री को यह बात समझ लेनी चाहिए कि विवाहित होकर विषय-वासना का शिकार बन जाना शरीर, मन तथा अंतरात्मा के लिए वैसा ही घातक है जैसा व्यभिचार । यदि पति अपनी इच्छा को अथवा कल्पित इच्छा को पूर्ण करना अपना वैवाहिक अधिकार समझता है और स्त्री केवल पति से डरकर उसकी इच्छा को पूर्ण करती है तो परिणाम वैसा ही घातक होता है जैसा हस्तमैथुन का ।’