माँ सुमित्रा जी की अनुपम सीख

माँ सुमित्रा जी की लक्ष्मण जी को अनुपम सीख भगवान श्रीरामचन्द्र जी को 14 वर्ष का वनवास मिला । लक्ष्मण जी ने उनसे कहाः “प्रभु ! मैं भी आपके साथ चलूँगा ।” श्रीराम जी ने कहाः “जाओ, माँ से विदा माँग आओ, उनसे आशीर्वाद ले आओ ।” लक्ष्मण जी ने माँ सुमित्रा को प्रणाम कर Read more…

माता जीजाबाई की युक्ति

माता जीजाबाई ने पुत्र शिवाजी में फूँका अदम्य प्राणबल 17वीं शताब्दी का समय था । हिन्दुस्तान में मुगल शासकों का अत्याचार, लूटमार बढ़ती ही जा रही थी । हिन्दुओं को जबरन मुसलमान बनाया जा रहा था । मुगलों के अतिरिक्त पुर्तगालियों व अंग्रेजों ने भी भारतभूमि में अपने कदम जमाने Read more…

कहाँ से मिले आध्यात्मिक संस्कार

श्री आनंदमयी माँ पर पड़ा माता-पिता के आध्यात्मिक जीवन का प्रभाव श्री आनंदमयी माँ के पिता विपिनबिहारी भट्टाचार्य एवं माता श्रीयुक्ता मोक्षदासुंदरी देवी (विधुमुखी देवी) – दोनों ही ईश्वर-विश्वासी, भक्तहृदय थे । माता जी के जन्म से पहले व बहुत दिनों बाद तक इनकी माँ को सपने में तरह-तरह के Read more…

सर्वगुणसंपन्न माता अँजना

हनुमान जी को माँ अँजना से मिली अनुपम शिक्षा माँ के जीवन और उसकी शिक्षा का बालक पर बहुत गहरा प्रभाव पड़ता है । इतिहास इस बात का साक्षी है कि आदर्श माताएँ अपनी संतानों को श्रेष्ठ एवं आदर्श बना देती हैं । पुराण आदि सत्शास्त्रों में ऐसे अनेक उदाहरण Read more…

किसकी सीख

विश्वप्रसिद्ध वैज्ञानिक जगदीशचन्द्र बसु ऐसे ही विश्वप्रसिद्ध जगदीशचन्द्र बसु, जो जीव-विज्ञान और भौतिक विज्ञान के सुप्रसिद्ध वैज्ञानिक थे, उनकी माँ ने कहाः “बेटा ! संध्या हो गयी है । इस पेड़ की नींद खराब न करो ।” माँ ने सत्संग में सुनी हुई बातें बतायीं । बालक ने बड़े होने पर वैज्ञानिक ढंग से Read more…

क्या हैं स्त्रियों के भूषण सात सदगुण

स्त्रियों के भूषण सात सदगुण जिस स्त्री में सात दिव्य गुण होते हैं, उसमें साक्षात भगवान का ओज तेज निवास करता है । एक है ʹकीर्तिʹ अर्थात् आसपास के लोगों का आपके ऊपर विश्वास हो । अड़ोस-पड़ोस के लोग आप में विश्वास करें, ऐसी आप सदाचारिणी हो जाओ । यह भगवान की Read more…

सीता जी के 12 दिव्य गुण कौन-से

जीवन को सफल बनाने वाले सीता जी के 12 दिव्य गुण पद्म पुराण (भूमि खंड, अध्याय 34) में स्त्री के जिन 12 दिव्य गुणों का वर्णन आता है, वे सारे-के-सारे सद्गुण सीता जी में थे । स्त्री का पहला सद्गुण है रूप । अपने रूप को साफ-सुथरा और प्रसन्नवदन रखना चाहिए, Read more…

अनमोल सूत्र

सुखमय गृहस्थ-जीवन के अनमोल सूत्र देवर्षि नारदजी भगवान का सुमिरन करते हुए कहते हैं : ‘‘युधिष्ठिर ! गृहस्थ-जीवन में मनुष्य को उस परमेश्वर का, निर्दुःख नारायण का महाप्रसाद, महा-अमृत पाना हो तो सनातन धर्म के कुछ नियमों को आचरण में लाये । ऐसा करने पर साधारण व्यक्ति, गृहस्थ में जीनेवाला Read more…

विचार-विमर्श का आदर्श

पारिवारिक विचार-विमर्श का आदर्श व वचन-पालन की अडिगता भगवान श्रीरामचन्द्र जी के वनवास के दौरान का प्रसंग है । भगवान राम सीता जी और लक्ष्मण जी के साथ एक-एक ऋषि आश्रम में गये । ऋषियों से मिलकर उनका कुशल-मंगल पूछा । ऋषि-मुनियों ने राक्षसों के आतंक के बारे में बताया Read more…

गृहस्थ का धर्म

गृहस्थ का धर्म गृहस्थ आश्रम खराब नहीं है, वह भी अच्छा है । वह एक वृक्ष के तने की भाँति है और उस वृक्ष की जड़ है ब्रह्मचर्य आश्रम तथा उसके फल-फूल हैं वानप्रस्थ एवं संन्यास आश्रम । नयी पाठशालाएँ, अनाथाश्रम आदि खोलना अथवा संत-महात्माओं की सेवा के कार्य आदि Read more…