कैसे बनें गृहस्थ में सफल

गृहस्थाश्रम में सफलता ब्रह्मचर्य, वानप्रस्थ और संन्यास – इन सब आश्रमों का आधार गृहस्थाश्रम ही है । गृहस्थ जीवन का मुख्य उद्देश्य है अपनी वासनाओं पर संयम रखना, एक-दूसरे की वासना को नियंत्रित कर त्याग और प्रेम उभारना तथा परस्पर जीवनसाथी बनकर एक दूसरे के जीवन को उन्नत करना । Read more…

सतीत्व का संरक्षण

सतीत्व का संरक्षण कन्या जब यौवनावस्था में प्रवेश कर रही हो तब उसके माता-पिता का पवित्र कर्तव्य हो जाता है कि उसके ये अति संवेदनशील एवं नाजुक काल में उसके चित्त का संरक्षण होता रहे ऐसा वातावरण बनायें । सत्साहित्य के पठन, मनन एवं संतजनों के दर्शन-सत्संग से कार्य स्वाभाविक Read more…

रजोदर्शन के नियम

रजोदर्शन के नियम रजोदर्शन के समय कैसे रहना चाहिए ? स्त्री-शरीर में जो मलिनता होती है वह प्रति मास रजस्राव के द्वारा निकल जाती है और वह स्त्री पवित्र हो जाती है । शास्त्रो में कहा गया है कि रजस्वला स्त्री को तीन दिन तक किसीका स्पर्श नहीं करना चाहिए Read more…

एलोपैथी के नुकसान

मासिक धर्म में पेन किलर का उपयोग घातक ! पेन किलर या मासिक लाने की या रोकने की गोलियाँ नींद की गोलियाँ खाने वाले सावधान ! इससे आगे चलकर स्वास्थ्य पर बहुत बुरा असर पड़ता है । लीवर, किडनी, पाचनतंत्र और ज्ञान तंतुओं पर देर-सबेर बहुत घातक असर पड़ता है Read more…

विवाह का प्रयोजन

विवाह का प्रयोजन    हरेक जीव, नर हो या नारी, अनादि काल से वासनाओं से पीड़ित होता आ रहा है । वासना की तुष्टि के लिए वह नये-नये शरीर धारण करता है और रस लेने में प्रयत्नशील रहता है । परंतु इस आनंद-प्राप्ति के प्रयास से ही वह बेचारा अपने Read more…

भारतीय दम्पत्ति सर्वाधिक सुखी क्यों

विश्व भर के दम्पत्तियों में भारतीय दम्पत्ति सर्वाधिक सुखी व संतुष्ट सनातन संस्कृति के दिव्य संस्कारों का प्रभाव देख चकित हुए विश्लेषक कुछ समय पहले मनोवैज्ञानिकों ने ʹप्लेनेट प्रोजेक्टʹ के अऩ्तर्गत इंटरनेट के माध्यम से विश्व भर के दम्पत्तियों के वैवाहिक जीवन का सर्वेक्षण किया । सर्वेक्षण का मुख्य उद्देश्य था ʹकिस देश Read more…

धन्या सा स्त्री…

कौन नारी पृथ्वी को पवित्र करती है ? लज्जा वासो भूषणं शुध्दशीलं पादक्षेपो धर्ममार्गे च यस्या: । नित्यं पत्यु:सेवनं मिष्टवाणी धन्या सा स्त्री पूतयत्येव पृथ्वीम् ।। ‘जिस स्त्री का लज्जा ही वस्त्र एवं विशुद्ध भाव ही भूषण हो, धर्ममार्ग में जिसका प्रवेश हो, मधुर वाणी बोलने का जिसमें गुण हो Read more…

नारी में श्रद्धा-विश्वास अधिक क्यों ?

नारी में श्रद्धा-विश्वाश क्यों अधिक है ? सूर्य स्थावर जंगम जगत की आत्मा है । सूर्य और चंद्र दोनों माया विशिष्ट ब्रह्म के नेत्र हैं । जिनके द्वारा ही जड़ चेतन जगत को जीवन मिलता है । स्त्री पार्थिव तत्व द्वारा इस जीवन को प्राप्त करती है और पुरुष अपने Read more…

आदर्श गृहस्थ जीवन के सोपान

आदर्श गृहस्थ-जीवन के सोपान सद्गृहस्थ, आदर्श गृहस्थ बनकर जीवन में सद्गति चाहते हो तो घर को, परिवार को अपना मानकर लोभी, मोही, अभिमानी न बनो । घर, परिवार, धन को अपने लिए समझो परंतु अपना न समझो क्योंकि ये सब संसार की वस्तुएँ हैं, तुम्हारी नहीं हैं । जो कुछ Read more…

कला… गृहस्थ-जीवन जीने की

गृहस्थी में रहने की कला जिन बातों को याद करने से तुम्हें चिंता होती है, दुःख होता है या किसीके दोष दीखते हैं, उन्हें विष की नाईं त्याग दो । जिन बातों से तुम्हारा उत्साह, आत्मिक बल बढ़ता है, प्रसन्नता बढ़ती है उनका आदर से चिंतन करो । अपने चित्त Read more…