सुखमय गृहस्थ-जीवन

गृहस्थ में सुखी रहने के उपाय अपनेवालों से न्याय, दूसरे से उदारता- यह सिद्धांत दिलों को व कुटुम्ब को जोड़कर रखता है । ‍‌सासु का कर्तव्य है कि बहुओं को अपने ह्रदय में, अपनी गोद में जगह दे । बहुओं का कर्तव्य है कि सास- ससुर को अपने दिल में Read more…

गृहस्थी का अमृत

गृहस्थी का अमृत ʹस्कन्द पुराणʹ में आया है कि गृहस्थ के घर नौ प्रकार का अमृत सदैव रहना चाहिए, इससे वह सुखी रहता है । ये सभी बिना पैसे के अमृत हैं । पहला – आपके घर कोई भी आ जाय तो उससे मीठे वचन बोलें । दूसरा – सौम्य दृष्टि Read more…

गृहस्थ-जीवन का सार

गृहस्थ-जीवन का यही सार है प्रेम का बाप है विश्वास और विश्वास का बाप है सच्चाई । पति-पत्नी को एक-दूसरे से सच्चाई से पेश आना चाहिए । पत्नी एक बार झूठ बोलेगी, दो बार, पाँच बार, दस बार तो आखिर पति भी तो रोटी खाता है, उसे पता चल जायेगा Read more…

गृहस्थ-जीवन के नियम

संसार-व्यवहार कब न करें ? विवाहित दंपत्ति भी संयम-नियम से रहें, ब्रह्मचर्य का पालन करते हुए रहें । सभी पक्षों की अमावस्या, पूर्णिमा, चतुर्दशी और अष्टमी-इन सभी तिथियों में स्त्री समागम करने से नीच योनि एवं नरकों की प्राप्ति होती है । (महाभारत, अनुशासन पर्व, दानधर्म पर्वः 104.29.30) दिन मेंऔरदोनों Read more…

गर्भाधान संस्कार क्यों

गर्भाधान संस्कार से उत्तम संतान की प्राप्ति शास्त्रो में गर्भाधान संस्कार की जो विधि जो बताई है उसका प्रायः लोप हो जाने के कारण ही आज कुलकलंक तथा देश-विदेश में आतंक पैदा करनेवाली संतानों की उत्त्पति हो रही है । अतः गर्भाधान संस्कार एक महत्वपूर्ण संस्कार है । स्त्री-पुरुष के Read more…

गर्भाधान के नियम

गर्भाधान के लिए उत्तम समय कौन-सा ? ऋतुकाल की उत्तरोत्तर रात्रियों में गर्भाधान श्रेष्ठ है लेकिन 11वीं व 13 वीं रात्रि वर्जित है। यदि पुत्र की इच्छा करनी हो तो पत्नी को ऋतुकाल की 4,6,8,10 व 12वीं रात्रि में से किसी एक रात्रि का शुभ मुहूर्त पसंद कर समागम करना Read more…

शास्त्रीय दिशानिर्देश

गर्भाधान किसमें ? माता की पाँच तथा पति की सात पीढ़ियों को छोड़कर असगोत्रा अपनी जाति की कन्या के साथ विवाह करके उसमें शास्त्रमर्यादानुसार गर्भाधान करना चाहिये । अन्यत्र कहीं भी गर्भाधान करने से वर्णसंकर संतान उत्पन्न होती है जो अपने समाज का अहित करके इस लोक में और पित्तरों Read more…

कैसे करें नवजात शिशु का स्वागत

बालक जन्मे तो क्या करें ? बच्चे के जन्मते ही नाभि-छेदन तुरंत नहीं बल्कि 4-5 मिनट के बाद करें । नाभिनाल में रक्त-प्रवाह बंद हो जाने पर नाल काटें। नाल को तुरंत काटने से बच्चे के प्राण भय से अक्रान्त हो जाते हैं, जिससे वह जीवन भर डरपोक बना रहता Read more…

जन्म कर्म च मे दिव्यं

जन्मदिवस पर क्या करें ? जन्मदिवस के अवसर पर महामृत्युंजय मंत्र का जप करते हुए घी, दूध, शहद और दूर्वा घास के मिश्रण की आहुतियाँ डालते हुए हवन करना चाहिए। ऐसा करने से आपके जीवन में कितने भी दुःख, कठिनाइयाँ, मुसीबतें हों या आप ग्रहबाधा से पीड़ित हों, उन सभी Read more…

बच्चे बच्चियों को नींद से कैसे जगायें

बच्चे बच्चियों को नींद से उठाने की मधुमय युक्ति बच्चों को यंत्र के बल से मत जगाओ । अलार्म की ध्वनि अथवा ‘ए उठो, उठो, ६ बज गये, ५ बज गये,७ बज गये…’ खटखट करके उठाने से ये बच्चे आपके लिए दुखदायी हो जायेंगे । सुबह बच्चों को उठाओ तो Read more…