मधुर व्यवहार

मधुर व्यवहार कुटुम्ब-परिवार में भी वाणी का प्रयोग करते समय यह आवश्य ख्याल में रखा जाय कि मैं जिससे बात करता हूँ वह कोई मशीन नहीं है, रोबोट नहीं है, लोहे का पुतला नहीं है मनुष्य है । उसके पास दिल है | हर दिल को स्नेह, सहानुभूति, प्रेम और आदर Read more…

वाणी ऐसी बोलिए़

वाणी की चतुराई एक बार किसी ने एक मरने योग्य बूढ़ा हाथी एक गांव में भेजा । साथ में गांववासियों को यह आदेश भी दे डाला कि इस हाथी के स्वास्थ्य की खबर मुझे रोजाना बताई जाए और जो कोई भी ग्रामवासी हाथी मर गया ऐसी सूचना मुझे देगा, उसे Read more…

सत्यं वद, धर्मं चर…

वाणी के गुण वाणी का हमारे जीवन में किस ढंग से प्रयोग हो, किस प्रकार की वाणी का प्रयोग न हो- यह जान लेना और तदनुसार उसका जीवन में प्रयोग करना आवश्यक है । सत्यता, दृढ़ता, मधुरता, संक्षिप्तता, हितकारिता, नम्रता और शिष्टता – यह सात वाणी के गुण हैं । Read more…

बुरा जो देखन मैं चला…

वाणी के दोष (१) कठोरता : गाली, कटु वचन अपनेको प्रिय नहीं होते, कठोर वचन तीर के समान हमारे अंतःकरण में चुभते हैं, इसलिए दूसरे को भी कठोर शब्दों के प्रहार से मत मारो । शस्त्रप्रहार से भी बलवान एवं घातक होता । मनुष्यों को शब्दों की चोट ऐसी लगती Read more…

सुख-दुःख की कुंजी

दुःखी न होना तुम्हारे हाथ की बात ! तुम निंदनीय काम न करो फिर भी अगर निंदा हो जाती है तो घबराने की क्या जरूरत है ? तुम अच्छे काम करो, प्रशंसा होती है तो जिसने करवाया उसको दे दो । बुरे काम हो गये तो प्रायश्चित्त करके रुको लेकिन Read more…

क्रोध से बचें

क्रोध को स्वयं पर हावी क्यों होने देते हो ? एक शिष्य ने अपने गुरु से कहा : “मैं बहुत जल्दी क्रोधित हो जाता हूँ, कृपया मुझे इससे छुटकारा दिलायें ।” गुरु ने कहा : “ये तो बहुत विचित्र बात है ! मुझे क्रोधित होकर दिखाओ ।” “अभी तो मैं Read more…

सच्ची क्षमा

सच्ची क्षमा सन् 1956 के आस-पास की घटना है । एक तहसीलदार थे । उनका गृहस्थ-जीवन बड़ा दुःखमय था क्योंकि उनकी धर्मपत्नी ठीक समय पर भोजन नहीं बना पाती थी, जिस कारण उन्हें कार्यालय पहुँचने में अकसर बहुत देर हो जाती थी । उन्होंने पत्नी को हर तरह से समझाया Read more…

आत्मबल कैसे जगायें ?

आत्मबल कैसे जगायें ?       हररोज प्रातः काल में जल्दी उठकर सूर्योदय से पूर्व स्नान आदि से निवृत्त हो जाओ । स्वच्छ पवित्र स्थान में आसन बिछाकर पूर्वाभिमुख होकर पद्मासन या सुखासन में बैठ जाओ । शांत प्रसन्न वृत्ति धारण करो । मन में दृढ़ भावना करो कि मैं प्रकृति Read more…

अनावश्यक विवाद क्यों ?

उस पर कभी विवाद न करें परमहंस योगानंद जी अपने जीवन का एक संस्मरण बताते हुए कहते हैं – “एक बार मैं अपने एक दलाल मित्र के साथ भारत के संतों की चर्चा कर रहा था । उसने मेरी बातों में कोई उत्साह नहीं दिखाया । उसने कहाः “ये सब Read more…

किसके साथ कैसा व्यवहार ?

किसके साथ कैसा व्यवहार ? आपको व्यवहार काल में अगर भक्ति में सफल होना है तो तीन बातें समझ लोः 1 अपने साथ पुरुषवत् व्यवहार करो । जैसे पुरुष का हृदय अनुशासनवाला, विवेकवाला होता है, ऐसे अपने प्रति तटस्थ व्यवहार करो । कहीं गलती हो गयी तो अपने मन को अनुशासित करो Read more…