आभूषण-चिकित्सा

विविध रोगों में आभूषण-चिकित्सा भारतीय समाज में स्त्री पुरूषों में आभूषण पहनने की परम्परा प्राचीनकाल से चली आ रही है। आभूषण धारण करने का अपना एक महत्त्व है, जो शरीर और मन से जुड़ा हुआ है। स्वर्ण के आभूषणों की प्रकृति गर्म है तथा चाँदी के गहनों की प्रकृति शीतल Read more…

लज्जा – स्त्री का भूषण

नारी-स्वातंत्र्य के विषय में कुछ मंतव्य ‘The flower of femininity blossoms only in the shade’ ‘नारी एक ऐसा पुष्प है जो छाया (घर) में ही अपनी सुगंध फैलाता है ।’ – लेमेनिस ‘Flower with the loveliest perfume are delicately attractive’ ‘श्रेष्ठ गंधवाला पुष्प लजीला और चित्ताकर्षक होता है ।’ – Read more…

सुरक्षा का साधन

युग के विनाशकारी प्रभाव से बचाकर विद्यार्थियों को महान ऊँचाई पर कैसे पहुँचायें ? प्राचीन काल में भारत की शिक्षण प्रणाली ऐसी थी कि विद्यार्थी 5 साल की उम्र से गुरुकुल में प्रवेश पाता और 15 साल तक उसको ऐसे संयमी और सादा जीवन बिता के इहलोक और परलोक में Read more…

आत्मबल जगाओ

आत्मबल जगाओ नारी शरीर मिलने से अपने को अबला मानती हो ? लघुताग्रन्थि में उलझकर परिस्थितियों में पीसी जाती हो ? अपना जीवन दीन-हीन बना बैठी हो ? तो अपने भीतर सुषुप्त आत्मबल को जगाओ । शरीर चाहे स्त्री का हो या पुरुष का । प्रकृति के साम्राज्य में जो Read more…

कैसे करें यौवन का सदुपयोग ?

उन्नति का सुयोग, यौवन का सदुपयोग आत्मनिष्ठ महापुरुष बड़े विलक्षण होते हैं । उनको कोई बात जँच जाती है तो स्वाभविक ही उनसे उस बात की पुनरावृति होती रहती है । जैसे नारायण बापू ज़ब मौज आती तो कह उठते: ‘हे प्रभु ! दया कर ।’  भगवत्पाद स्वामी श्री श्री लीलाशाहजी Read more…

सबसे श्रेष्ठ संपत्तिः चरित्र

सबसे श्रेष्ठ संपत्तिः चरित्र चरित्र मानव की श्रेष्ठ संपत्ति है, दुनिया की समस्त संपदाओं में महान संपदा है । पंचभूतों से निर्मित मानव-शरीर की मृत्यु के बाद, पंचमहाभूतों में विलीन होने के बाद भी जिसका अस्तित्व बना रहता है, वह है उसका चरित्र । चरित्रवान व्यक्ति ही समाज, राष्ट्र व Read more…

यौवन का मूल क्या है ?

यौवन का मूल : संयम-सदाचार चाय-कॉफी की जगह ऋतु के अनुकूल फलों का सेवन अच्छा स्वास्थ्य-लाभ तो देता ही है, शरीर को पुष्ट भी करता है । सात्विक एवं अल्प आहार भी ब्रह्मचर्य की रक्षा में सहायक है । कम खाने का मतलब यह नहीं कि तुम २०० ग्राम खाते Read more…

कौन है हर समय आपके साथ…

स्वयं को अकेला मत समझो हे विद्यार्थी ! ईश्वर की असीम शक्ति तेरे साथ जुड़ी है । तू कभी अपने को अकेला मत समझना । तेरे दिल में दिलबर और गुरु का ज्ञान दोनों साथ हैं । परमात्म-तत्त्व और गुरु-तत्त्व की चेतना इन दोनों का सहयोग लेते हुए, विकारों एवं Read more…

ये दो सूत्र अपना लो बस…

वंदनीय युवावस्था बाहर का जीवन भले सीधा-सादा हो लेकिन जिसने यौवनकाल में अपने यौवन की सुरक्षा की है, वह चाहे जो भी संकल्प करे और उसमें लगा रहे तो देर-सवेर वह सफलता के सिंहासन पर पहुँच जाता है और यदि परमात्मा को पाने का संकल्प करे तो अपने परमात्मप्राप्ति रूपी Read more…