भारतीय मनोविज्ञान कितना यथार्थ

भारतीय मनोविज्ञान कितना यथार्थ आज के बड़े बड़े डॉक्टर और मनोवैज्ञानिक भारत के ऋषि-मुनियों की ब्रह्मचर्य-विषयक विचारधारा का, उनकी खोज का समर्थन करते हैं । डॉ. ई. पेरियार का कहना है : “यह अत्यंत झूठा विचार है कि ‘पूर्ण ब्रह्मचर्य से हानि होती है ।’ नवयुवकों के शरीर, चरित्र और Read more…

क्या है सफल व महान बनने की कुंजी ?

सफल व महान बनने की कुंजीः संयम हे नौजवानो ! जीवन की नींव है संयम-सदाचार । संयम नहीं तो फिर अच्छे विद्यार्थी, अच्छे नागरिक भी नहीं बन सकते । संयम से एकाग्रता आदि सद्गुण विकसित होते हैं । संयम ही सफलता की सीढ़ी है । भगवान को पाना हो, सिद्धि-प्रसिद्धि Read more…

स्वामी बनो…गुलाम नहीं

हे युवान ! गुलाम नहीं स्वामी बनो मैकाले कहा करता थाः “यदि इस देश को हमेशा के लिए गुलाम बनाना चाहते हो तो हिन्दुस्तान की स्वदेशी शिक्षा पद्धति को समाप्त कर उसके स्थान पर अंग्रेजी शिक्षा-पद्धति लाओ । फिर इस देश में शरीर से तो हिन्दुस्तानी लेकिन दिमाग से अंग्रेज पैदा Read more…

क्या ब्रह्मचर्य पालन सरल है ?

ब्रह्मचर्य का पालन क्यों और कैसे ? वास्तव में ‘ब्रह्मचर्य’ शब्द का अर्थ हैः ‘ब्रह्म के स्वरूप में विचरण करना ।’ जिसका मन नित्य-निरंतर सच्चिदानंद ब्रह्म में विचरण करता है, वही पूर्ण ब्रह्मचारी है । इसमें प्रधान आवश्यकता है – शरीर, इन्द्रियाँ, मन और बुद्धि के बल की । यह Read more…

ब्रह्मचर्य रक्षा मंत्र

ब्रह्मचर्य रक्षा हेतु मंत्र एक कटोरी दूध में निहारते हुए इस मंत्र का इक्कीस बार जप करें । तदपश्चात उस दूध को पी लें, ब्रह्मचर्य रक्षा में सहायता मिलती है । यह मंत्र सदैव मन में धारण करने योग्य है : ॐ नमो भगवते महाबले पराक्रमाय मनोभिलाषितं मनः स्तंभ कुरु कुरु स्वाहा ।  

ब्रह्मचर्य-सहायक प्राणायाम

ब्रह्मचर्य-सहायक प्राणायाम कई लोग ब्रह्मचर्य पालना चाहते हैं और उसके लिए औषधियाँ व दवाइयाँ ले-लेकर थक जाते हैं लेकिन ब्रह्मचर्य में विफल हो जाते हैं । मुख्य कारणों में एक तो है आकर्षित होने का स्वभाव । इस बिगड़े स्वभाव पर कोई औषधि काम नहीं करेगी, ब्रह्मचर्य-नाश हो जायेगा । Read more…

हे विद्यार्थियों तुम किस ओर जा रहे हो ?

हे विद्यार्थियों तुम किस ओर जा रहे हो ? कोई भी मनुष्य पूर्ण रूप से पापी नहीं हो सकता । कुछ-न-कुछ पुण्य का अंश तो रहता ही है । उसी पुण्य के अंश से आप अपने हित के लिए आध्यात्मिक चर्चा सुनते हो, इस प्रकार की पुस्तकें पढ़ते हो और Read more…