ईश्वर में मन लगायें या पढ़ाई में ?

ईश्वर में मन लगायें या पढ़ाई में ? ईश्वर में मन लगायें कि नहीं लगायें ? अगर ईश्वर में मन लगायें तो फिर पढ़ने में मन कैसे लगेगा ? बताओ, अब क्या करना चाहिए बच्चों को ? बोले, ‘मन लगा के पढ़ना चाहिए ।’ यह बात भी सच्ची है । फिर बोलते हैं : ‘ईश्वर के सिवाय कहीं भी Read more…

बुलंदियों तक पहुँचानेवाले दो पंख

बुलंदियों तक पहुँचानेवाले दो पंख बच्चों को प्राणशक्ति और ज्ञानशक्ति (बुद्धिशक्ति) – इन दो शक्तियों की जरूरत है । ये दोनों बढ़ गयीं तो व्यक्ति सारी दुनिया को आश्चर्य में डाल सकता है । जिसके जीवन में ज्ञानदाता एवं प्राणशक्ति बढ़ाने की कला जाननेवाले सद्गुरु नहीं हैं, वह बड़ा होते Read more…

हमेशा उत्साही बने रहने की सुंदर, सरल युक्ति

हमेशा उत्साही बने रहने की सुंदर, सरल युक्ति जीवन में हमेशा उत्साह बने रहने की युक्ति यह है कि हमारा मददगार बहुत विश्वसनीय, सर्वोत्तम और सूझबूझ का धनी होना चाहिए । यदि हमको यह विश्वास है कि हर समय ईश्वर हमारे साथ है और हमको निरंतर उसकी मदद मिल रही Read more…

हे विद्यार्थियो ! जिज्ञासु बनो

हे विद्यार्थियो ! जिज्ञासु बनो विश्व की सारी बड़ी-बड़ी खोजें – चाहे वे ऐहिक जगत की हों, बौद्धिक जगत की हों, धार्मिक जगत की हों अथवा तात्त्विक जगत की हों – सब खोजें हुई हैं जिज्ञासा से ही । इसलिए अगर अपने जीवन को उन्नत करना चाहते हो तो जिज्ञासु Read more…

सर्व सफलताओं का मूल आत्मविश्वास

सर्व सफलताओं का मूल आत्मविश्वास किसी भी क्षेत्र में सफलता का मूल रहस्य आत्मविश्वास है । आत्मविश्वास का मुख्य उद्देश्य है हृदय-क्षुद्रता का निराकरण । जिसके अंदर आत्मविश्वास होता है वह अनेक प्रतिकूलताओं के बावजूद संतुलित मनोमस्तिष्क से हर समस्या का समाधान सहज ही कर लेता है । अगर सारी Read more…

सती अरून्धती

सती अरून्धती पतिव्रता शिरोमणि अरून्धती का नाम तीनों लोकों में विख्यात है । वे ब्रह्मर्षि वसिष्ठजी की धर्मपत्नी हैं । इनके अनुपम पातिव्रत्य की कहीं भी तुलना नहीं हो सकती । काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद और मात्सर्य- ये छः दोष जो प्राणिमात्रके स्वाभाविक शत्रु हैं, अरुन्धती देवी की ओर Read more…

सती शतरूपा

सती शतरूपा शतरूपा मानव सर्ग की आदिमाता हैं । वे स्वायम्भूव मनु की पत्नी थीं । मनु और शतरूपा से ही मानव सृष्टि का आरम्भ हुआ । श्रुति भी कहती है- ‘ततो मनुष्या अजायत्त ।’ मनु और शतरूपा दोनों ही ब्रह्माजी के शरीर से उत्पन्न हुए हैं । दक्षिण भाग Read more…

अथाह शौर्य की धनी – किरण देवी

अथाह शौर्य की धनी: किरण देवी मेवाड़ के सूर्य महाराणा प्रताप के भाई शक्तिसिंह की कन्या का नाम था किरण देवी । वह परम सुन्दरी और सुशीला थी । उसका विवाह बीकानेर नरेश के भाई महाराज पृथ्वीराज से हुआ था । ये वही पृथ्वीराज थे जिनकी कविता ने महाराणा प्रताप Read more…

कर्मनिष्ठ श्यामो

कर्मनिष्ठ श्यामो यतः प्रवृत्तिर्भूतानां येन सर्वमिदं ततम्। स्वकर्मणा तमभ्यर्च्यं सिद्धिं विन्दति मानवः।। ‘जिस परमात्मा से सर्वभूतों की उत्पत्ति हुई है और जिससे यह सर्व जगत व्याप्त है उस परमेश्वर के अपने स्वाभाविक कर्मों द्वारा पूजकर मनुष्य परम सिद्धि को प्राप्त होता है।’ (श्रीमदभगवदगीताः 18.46) अपने स्वाभाविक कर्मरूपी पुष्पों द्वारा सर्वव्यापक Read more…

रुपनगढ़ की राजकुमारी

रूपनगढ़ की राजकुमारी रूपनगढ़ के राजा विक्रमसिंह की बेटी का नाम था चंचला । एक दिन चित्र बेचने वाली एक मुसलमान महिला राजमहल में चित्र लेकर आई और सब को दिखाने लगी । उसके द्वारा दिखाए गए चित्रों में शाहजहाँ अकबर, महाराणा प्रताप आदि के चित्र थे । आखिर में Read more…