glory of satguru

सद्गुरु महिमा आध्यात्मिक विकास एवं दिव्य जीवन की प्राप्ति हेतु पूर्ण सत्य के ज्ञाता, समर्थ सदगुरु की अत्यंत आवश्यकता होती है। जैसे प्रकाश बिना अंधकार का नाश संभव नहीं, वैसे ही ब्रह्मनिष्ठ सदगुरु के बिना अज्ञानांधकार का नाश सम्भव नहीं। अतः शास्त्र और संतजन सदगुरु की महिमा गाते-गाते नहीं अघाते। Read more…

Aura

आभामंडल – विज्ञान भी नतमस्तक हर मनुष्य, जीव-जंतु, पशु, पेड़-पौधा या वस्तु के चारों ओर सप्तरंगीय ऊर्जा तरंगें निष्कासित होती रहती हैं व एक अति सूक्ष्म गोलीय चक्र-सा प्रतिबिम्ब रहता है, जिसको ‘आभामण्डल (ओरा)’ कहते हैं । देवी-देवताओं तथा संत-महापुरुषों के श्रीचित्रों में उनके सिर के पीछे दिखने वाला चमकीला, Read more…

aatmgyan

यही आत्मसाक्षात्कार है प्रकृतेः क्रियमाणानि गुणैः कर्माणि सर्वशः। अहंकारविमूढात्मा कर्ताहमिति मन्यते।।  (गीताः 3.27) प्रकृति में ही गुण कर्म हो रहे हैं लेकिन अहंकार से जो विमूढ़ हो गये, वे अपने को कर्ता-भोक्ता, सुखी-दुःखी मानते हैं। भाव आये तो मैं दुःखी हूँ या मैं सुखी हूँ यह आयेगा अथवा तो ‘मेरे Read more…

satsang shrawan

सत्संग महिमा सत्संग अर्थात् सत् का संग, शाश्वत का संग और शाश्वत केवल परमात्मा है । सत्संग की आधी घड़ी सुमिरन बरस पचास । बरखा बरसे एक घड़ी अरहट फिरे बारों मास ।। जैसे अरहट बारहों मास फिरता रहे फिर भी उतनापानी नहीं दे पातालेकिन एक घड़ी की वर्षा बहुतसारा Read more…

swadhyay

क्या है स्वाध्याय ? आत्मसाक्षात्कारी ज्ञानीजनों द्वारा रचित आध्यात्मिक शास्त्रों एवं पुस्तकों का अध्ययन ‘स्वाध्याय’ कहलाता है । पवित्र ग्रंथों का दैनिक पारायण स्वाध्याय है । यह राजयोग के नियम का चौथा अंग है । आत्मस्वरूप के विश्लेषण को या ‘मैं कौन हूँ ?’ के ज्ञान को ही स्वाध्याय की Read more…

ajapa jap

अजपाजप प्रतिजैविक औषध (एंटीबायोटिक) और पेनकिलर, क्या-क्या खाने के बाद भी लोग तंदुरुस्त दिखाई नहीं देते । क्या-क्या मनौतियों के बाद भी लोग निश्चिंत नहीं दिखाई देते । कितने-कितने उपायों के बाद भी लोग पूरे आनंदित नहीं दिखाई देते । क्या-क्या देश-विदेश की यात्राएँ और आविष्कार करने के बाद भी Read more…

Meditation

ध्यान महिमा   ध्यान का मतलब क्या ?   ध्यान है डूबना । ध्यान है आत्म-निरीक्षण करना… ‘हम कैसे है’ यह देखना… ‘कहाँ तक पहुंचे है’ यह देखना… ‘कितना अपने-आपको भूल पाये है’ यह देखना… ‘कितना विस्मृतियोग में डूब पाये है’ यह देखना… ध्यान अर्थात् न करना… कुछ भी न Read more…

yogic chakras

यौगिक चक्र चक्रः चक्र आध्यात्मिक शक्तियों के केन्द्र हैं । स्थूल शरीर में ये चक्र चर्मचक्षुओं से नहीं दिखते हैं । क्योंकि ये चक्र हमारे सूक्ष्म शरीर में होते हैं । फिर भी स्थूल शरीर के ज्ञानतंतुओं-स्नायुकेन्द्रों के साथ समानता स्थापित करके उनका निर्देश किया जाता है । हमारे शरीर Read more…

स्त्री… सुखी जीवन का आधार

स्त्रियाँ कुछ भी बर्बाद, नही होने देतीं। वो सहेजती हैं, संभालती हैं। ढकती हैं, बाँधती हैं। उम्मीद के आख़िरी छोर तक। कभी तुरपाई कर के, कभी टाँका लगा के। कभी धूप दिखा के, कभी हवा झला के। कभी छाँटकर, कभी बीनकर। कभी तोड़कर, कभी जोड़कर। देखा होगा ना ? अपने ही Read more…

कुछ प्रयोग…स्मरणशक्ति बढ़ाने के

स्मृति व ग्रहण शक्तिवर्धक प्रयोग मालकांगनी (ज्योतिष्मती) उत्तम मेधाजनक है । १ से १० बूंद मालकांगनी तेल बतासे पर डालकर खायें व ऊपर से गाय का दूध पियें । ४० दिन तक यह प्रयोग करने से स्मृति व ग्रहण शक्ति में लक्षणीय वृद्धि होती है । इन दिनों में उष्ण Read more…