अथाह सामर्थ्य की धनी- तपस्वी शाण्डिलिनी

अथाह शक्ति की धनीः तपस्विनी शाण्डालिनी शाण्डालिनी का रूप-लावण्य और सौन्दर्य देखकर गालव ऋषि और गरूड़जी मोहित हो गये । ‘ऐसी सुन्दरी और इतनी तेजस्विनी ! वह भी धरती पर तपस्यारत ! यह स्त्री तो भगवान विष्णु की भार्या होने के योग्य है….’ ऐसा सोचकर उन्होंने शाण्डालिनी के आगे यह Read more…

आत्मविद्या की धनी – फुलीबाई

आत्मविद्या की धनीः फुलीबाई यह जोधपुर (राजस्थान) के पास के गाँव की महान नारी फुलीबाई की गाथा है । कहते हैं कि उनके पति शादी के थोड़े समय बाद ही स्वर्ग सिधार गये थे । उनके माता-पिता ने कहाः “तेरा सच्चा पति तो परमात्मा ही है, बेटी ! चल, तुझे Read more…

उत्तम जिज्ञासु – मैत्रेयी

उत्तम जिज्ञासुः मैत्रेयी महर्षि याज्ञवल्क्यजी की दो पत्नियाँ थीः मैत्रेयी और कात्यायनी । मैत्रेयी ज्येष्ठ थी । कात्यायनी की प्रज्ञा सामान्य स्त्रियों जैसी ही थी किंतु मैत्रेयी ब्रह्मवादिनी थी । एक दिन याज्ञवाल्क्यजी ने अपनी दोनों पत्नियों को अपने पास बुलाया और कहाः “मेरा विचार अब संन्यास लेने का है । Read more…

दैवी शक्तियों से संपन्न – गुणमंजरी देवी

दैवी शक्तियों से सम्पन्न गुणमंजरी देवी प्रयागराज इलाहाबाद में त्रयोदशी के कुंभ-स्नान का पर्व-दिवस था। कुंभ में कई अखाड़ेवाले, जति-जोगि, साधु-संत आये थे। उसमें कामकौतुकी नामक एक ऐसी जाति भी आयी थी जो भगवान के लिए ही राग-रागिनियों का अभ्यास किया करती थी तथा भगवदगीत के सिवाय और कोई गीत Read more…

नागगंधा बनी महान योगिनी

नागगंधा बनी महान योगिनी सदगुरु इस पृथ्वी पर साक्षात् ईश्वर हैं, सच्चे मित्र एवं परम विश्वसनीय बंधु हैं । वे ज्ञान के पथप्रदर्शक हैं, उद्धारक एवं संरक्षक हैं । संसार-सागर से पार जाने के लिए गुरुही एकमात्र आधार हैं । दोषो-दुर्गुणों एवं स्वार्थ से भरे इस में सतगुरु के सिवा Read more…

ब्रह्मज्ञानिनी सुलभा

ब्रम्हज्ञानिनी सुलभा अनेक ब्रम्हवादी जनक की सभाको सुशोभित करते हैं । परंतु अभी भी वादके द्वारा अपने मतकी स्थापना और दूसरोंके मतका खंडन करने की उनकी प्रवृत्ति गई नहीं । यह तो अपूर्णता का परिचायक है । आत्मस्वरूपकी उपलब्धि के अनन्तर कौन किसका खंडन करेगा । ऐसे विवेकी, साधुसेवी नरेश Read more…

ब्रह्मज्ञानिनी विदुषी गार्गी

ब्रह्मवादिनी विदुषी गार्गी ब्रह्मवादिनी विदुषी गार्गी का नाम वैदिक साहित्य में अत्यंत विख्यात है । उनका असली नाम क्या था, यह तो ज्ञात नहीं है किंतु उनके पिता का नाम वचक्नु था । अतः वचक्नु की पुत्री होने के कारण उनका नाम ‘वाचक्नवी’ पड़ गया । गर्ग गोत्र में उत्पन्न होने के Read more…

ब्रह्मज्ञानिनी रोमशा

ब्रह्मवादिनी रोमशा रोमशा बृहस्पतिजी की पुत्री थीं और भावभव्य की धर्मपत्नी । इन्होंने ऋग्वेद संहिता के प्रथम मण्डल के १२६ वें सूक्त की सात ऋचाओं का संकलन किया है । कहते हैं कि इनके सारे शरीर में रोमावली थी, इससे इनके पति इन्हें नहीं चाहते थे ।   यह भी Read more…

ब्रह्मज्ञानिनी वाक्

ब्रह्मवादिनी वाक् वाक् अभृण ऋषि की कन्या थी । यह प्रसिद्ध ब्रह्मवादिनी थी और इन्होंने भगवती देवी के साथ अभिन्नता प्राप्त कर ली थी । ऋग्वेद संहिता के दशम मण्डल के १२५ वें सूक्त में देवीसूक्त के नाम से जो आठ मंत्र हैं, वें इन्हीं के रचे हुए हैं । Read more…

ब्रह्मज्ञानिनी सूर्या

ब्रह्मवादिनी सूर्या ऋग्वेद के दशम मण्डल के ८५ वें सूक्त की ४७ ऋचाएँ इनकी हैं । यह सूक्त विवाह-सम्बन्धी हैं । आरम्भ की ऋचाओं में चन्द्रमा के साथ सूर्यकन्या सूर्या के विवाह का वर्णन है । हिंदू वेद-शास्त्रों में जितने आख्यान हैं, उन सबके आध्यात्मिक, आधिदैविक और आधिभौतिक तीनों अर्थ Read more…