ऊँची पढ़ाई या तुच्छ पढ़ाई ?

किसको कहते हैं ऊँची पढ़ाई और तुच्छ पढ़ाई ? जिनके जीवन का लक्ष्य ऊँचा नहीं है वे हलकी इच्छाओं में, हलके दिखावों में, हलके आकर्षणों में खप जाते हैं । जीवन का कोई ऊँचा ध्येय बना लेना चाहिए और ऊँचे में ऊँचा ध्येय तो यह है कि जीवनदाता का अनुभव Read more…

देवी–देवताओं के स्वरुप विविध क्यों

देवी-देवताओं के स्वरुप विविध क्यों ? देवी-देवताओं के अलग-अलग रूप व उनकी विविध वेशभूषा उनके विशिष्ट गुण दर्शाते हैं । भगवान विष्णुजी सृष्टि के पालनकर्ता होने से चतुर्भुज रूप हैं । प्रलायकर्ता होने से भगवान शंकरजी का तीसरा नेत्र अग्निस्वरूप है । माँ सरस्वती विद्या की देवी होने से हाथों Read more…

यौवन, धन और स्वास्थ्य का सदुपयोग

यौवन, धन और स्वास्थ्य का सदुपयोग यौवनं धनसम्पत्तिः प्रभुत्वमविवेकिता । एकैकमप्यनर्थाय किम् यत्र चतुष्टकम् ।। अर्थ : यौवन, धन-सम्पत्ति, सत्ता और अविचार इनमें से एक भी अनर्थ का कारण हो सकता है, फिर जहाँ ये चारों हों वहाँ क्या होगा ? अर्थ-अनर्थकारी तीन वस्तुएँ धन, यौवन और सत्ता – ये Read more…