अनमोल सूत्र

सुखमय गृहस्थ-जीवन के अनमोल सूत्र देवर्षि नारदजी भगवान का सुमिरन करते हुए कहते हैं : ‘‘युधिष्ठिर ! गृहस्थ-जीवन में मनुष्य को उस परमेश्वर का, निर्दुःख नारायण का महाप्रसाद, महा-अमृत पाना हो तो सनातन धर्म के कुछ नियमों को आचरण में लाये । ऐसा करने पर साधारण व्यक्ति, गृहस्थ में जीनेवाला Read more…

विचार-विमर्श का आदर्श

पारिवारिक विचार-विमर्श का आदर्श व वचन-पालन की अडिगता भगवान श्रीरामचन्द्र जी के वनवास के दौरान का प्रसंग है । भगवान राम सीता जी और लक्ष्मण जी के साथ एक-एक ऋषि आश्रम में गये । ऋषियों से मिलकर उनका कुशल-मंगल पूछा । ऋषि-मुनियों ने राक्षसों के आतंक के बारे में बताया Read more…

गृहस्थ का धर्म

गृहस्थ का धर्म गृहस्थ आश्रम खराब नहीं है, वह भी अच्छा है । वह एक वृक्ष के तने की भाँति है और उस वृक्ष की जड़ है ब्रह्मचर्य आश्रम तथा उसके फल-फूल हैं वानप्रस्थ एवं संन्यास आश्रम । नयी पाठशालाएँ, अनाथाश्रम आदि खोलना अथवा संत-महात्माओं की सेवा के कार्य आदि Read more…

कैसे बनें गृहस्थ में सफल

गृहस्थाश्रम में सफलता ब्रह्मचर्य, वानप्रस्थ और संन्यास – इन सब आश्रमों का आधार गृहस्थाश्रम ही है । गृहस्थ जीवन का मुख्य उद्देश्य है अपनी वासनाओं पर संयम रखना, एक-दूसरे की वासना को नियंत्रित कर त्याग और प्रेम उभारना तथा परस्पर जीवनसाथी बनकर एक दूसरे के जीवन को उन्नत करना । Read more…

क्या है सदगृहस्थों के लक्षण ?

सद्गृहस्थों के आठ लक्षण सदगृहस्थों के लक्षण बताते हुए महर्षि अत्रि कहते हैं कि अनसूया, शौच, मंगल, अनायास, अस्पृहा, दम, दान तथा दया – ये आठ श्रेष्ठ विप्रों तथा सदगृहस्थों के लक्षण हैं । यहाँ इनका संक्षिप्त परिचय दिया जा रहा हैः अनसूयाः जो गुणवानों के गुणों का खंडन नहीं Read more…