कैसे करें यौवन का सदुपयोग ?

उन्नति का सुयोग, यौवन का सदुपयोग आत्मनिष्ठ महापुरुष बड़े विलक्षण होते हैं । उनको कोई बात जँच जाती है तो स्वाभविक ही उनसे उस बात की पुनरावृति होती रहती है । जैसे नारायण बापू ज़ब मौज आती तो कह उठते: ‘हे प्रभु ! दया कर ।’  भगवत्पाद स्वामी श्री श्री लीलाशाहजी Read more…

सबसे श्रेष्ठ संपत्तिः चरित्र

सबसे श्रेष्ठ संपत्तिः चरित्र चरित्र मानव की श्रेष्ठ संपत्ति है, दुनिया की समस्त संपदाओं में महान संपदा है । पंचभूतों से निर्मित मानव-शरीर की मृत्यु के बाद, पंचमहाभूतों में विलीन होने के बाद भी जिसका अस्तित्व बना रहता है, वह है उसका चरित्र । चरित्रवान व्यक्ति ही समाज, राष्ट्र व Read more…

यौवन का मूल क्या है ?

यौवन का मूल : संयम-सदाचार चाय-कॉफी की जगह ऋतु के अनुकूल फलों का सेवन अच्छा स्वास्थ्य-लाभ तो देता ही है, शरीर को पुष्ट भी करता है । सात्विक एवं अल्प आहार भी ब्रह्मचर्य की रक्षा में सहायक है । कम खाने का मतलब यह नहीं कि तुम २०० ग्राम खाते Read more…

कौन है हर समय आपके साथ…

स्वयं को अकेला मत समझो हे विद्यार्थी ! ईश्वर की असीम शक्ति तेरे साथ जुड़ी है । तू कभी अपने को अकेला मत समझना । तेरे दिल में दिलबर और गुरु का ज्ञान दोनों साथ हैं । परमात्म-तत्त्व और गुरु-तत्त्व की चेतना इन दोनों का सहयोग लेते हुए, विकारों एवं Read more…

ये दो सूत्र अपना लो बस…

वंदनीय युवावस्था बाहर का जीवन भले सीधा-सादा हो लेकिन जिसने यौवनकाल में अपने यौवन की सुरक्षा की है, वह चाहे जो भी संकल्प करे और उसमें लगा रहे तो देर-सवेर वह सफलता के सिंहासन पर पहुँच जाता है और यदि परमात्मा को पाने का संकल्प करे तो अपने परमात्मप्राप्ति रूपी Read more…

भारतीय मनोविज्ञान कितना यथार्थ

भारतीय मनोविज्ञान कितना यथार्थ आज के बड़े बड़े डॉक्टर और मनोवैज्ञानिक भारत के ऋषि-मुनियों की ब्रह्मचर्य-विषयक विचारधारा का, उनकी खोज का समर्थन करते हैं । डॉ. ई. पेरियार का कहना है : “यह अत्यंत झूठा विचार है कि ‘पूर्ण ब्रह्मचर्य से हानि होती है ।’ नवयुवकों के शरीर, चरित्र और Read more…

क्या है सफल व महान बनने की कुंजी ?

सफल व महान बनने की कुंजीः संयम हे नौजवानो ! जीवन की नींव है संयम-सदाचार । संयम नहीं तो फिर अच्छे विद्यार्थी, अच्छे नागरिक भी नहीं बन सकते । संयम से एकाग्रता आदि सद्गुण विकसित होते हैं । संयम ही सफलता की सीढ़ी है । भगवान को पाना हो, सिद्धि-प्रसिद्धि Read more…

स्वामी बनो…गुलाम नहीं

हे युवान ! गुलाम नहीं स्वामी बनो मैकाले कहा करता थाः “यदि इस देश को हमेशा के लिए गुलाम बनाना चाहते हो तो हिन्दुस्तान की स्वदेशी शिक्षा पद्धति को समाप्त कर उसके स्थान पर अंग्रेजी शिक्षा-पद्धति लाओ । फिर इस देश में शरीर से तो हिन्दुस्तानी लेकिन दिमाग से अंग्रेज पैदा Read more…