क्या ब्रह्मचर्य पालन सरल है ?

ब्रह्मचर्य का पालन क्यों और कैसे ? वास्तव में ‘ब्रह्मचर्य’ शब्द का अर्थ हैः ‘ब्रह्म के स्वरूप में विचरण करना ।’ जिसका मन नित्य-निरंतर सच्चिदानंद ब्रह्म में विचरण करता है, वही पूर्ण ब्रह्मचारी है । इसमें प्रधान आवश्यकता है – शरीर, इन्द्रियाँ, मन और बुद्धि के बल की । यह Read more…

ब्रह्मचर्य रक्षा मंत्र

ब्रह्मचर्य रक्षा हेतु मंत्र एक कटोरी दूध में निहारते हुए इस मंत्र का इक्कीस बार जप करें । तदपश्चात उस दूध को पी लें, ब्रह्मचर्य रक्षा में सहायता मिलती है । यह मंत्र सदैव मन में धारण करने योग्य है : ॐ नमो भगवते महाबले पराक्रमाय मनोभिलाषितं मनः स्तंभ कुरु कुरु स्वाहा ।  

ब्रह्मचर्य-सहायक प्राणायाम

ब्रह्मचर्य-सहायक प्राणायाम कई लोग ब्रह्मचर्य पालना चाहते हैं और उसके लिए औषधियाँ व दवाइयाँ ले-लेकर थक जाते हैं लेकिन ब्रह्मचर्य में विफल हो जाते हैं । मुख्य कारणों में एक तो है आकर्षित होने का स्वभाव । इस बिगड़े स्वभाव पर कोई औषधि काम नहीं करेगी, ब्रह्मचर्य-नाश हो जायेगा । Read more…

विजातीय परिचय की मर्यादा

विजातीय परिचय की मर्यादा व्यवहारिक क्षेत्र में स्त्री-पुरुष के बीच संपर्क केवल आवश्कता के मुताबिक ही होना चाहिये । साधारण स्तर पर स्त्री के लिए पुरुष के शरीर को और पुरुष के लिए स्त्री के शरीर को स्पर्श करना बिल्कुल जोखम है । विजातीय स्पर्श में हमेशा विकार की संभावना Read more…