भक्तिमती जनाबाई

भक्तिमती जनाबाई भगवान कब, कहाँ और कैसे अपनी लीला प्रकट करके भक्तों की रक्षा करते हैं, यह कहना मुश्किल है ! भक्तों का इतिहास देखते हैं, उनका चरित्र पढ़ते हैं तब भगवान के अस्तित्व पर विशेष श्रद्धा हो जाती है । गोदावरी नदी के तट पर स्थित गंगाखेड़ (जि. परमणी, Read more…

मीराबाई की गुरुभक्ति

मीराबाई की गुरुभक्ति भक्तिमती मीराबाई का एक प्रसिद्ध भजन हैः पग घुँघरू बाँध मीरा नाची रे । लोग कहें मीरा भई रे बावरी, सास कहे कुलनासी रे । बिष को प्यालो राणाजी भेज्यो, पीवत मीरा हाँसी रे । मैं तो अपने नारायण की, आपहि हो गइ दासी रे । मीरा Read more…

मुक्ताबाई का सर्वत्र विठ्ठल दर्शन

मुक्ताबाई का सर्वत्र विट्ठल-दर्शन श्रीनिवृत्तिनाथ, ज्ञानेश्वर एवं सोपानदेव की छोटी बहन थी मुक्ताबाई । जन्म से ही चारों सिद्ध योगी, परम विरक्त एवं सच्चे भगवदभक्त थे । बड़े भाई निवृत्तिनाथ ही सबके गुरु थे । नन्हीं सी मुक्ता कहतीः “विट्ठल ही मेरे पिता हैं । शरीर के माता-पिता तो मर जाते Read more…

रतनबाई की गुरुभक्ति

रतनबाई की गुरुभक्ति गुजरात के सौराष्ट्र प्रान्त में नरसिंह मेहता नाम के एक उच्चकोटि के महापुरुष हो गये । वे जब भजन गाते तो श्रोतागण भक्तिभाव से सराबोर हो उठते थे । दो लड़कियाँ नरसिंह मेहता की बड़ी भक्तिन थीं । लोगों ने अफवाह फैला दी की उन दो कुंवारी Read more…

वेणाबाई की गुरुनिष्ठा

वेणाबाई की गुरुनिष्ठा एक बार समर्थ रामदासजी मिरज गाँव (महाराष्ट्र) पधारे । वहाँ उन्होंने किसी विधवा कन्या को तुलसी के वृंदावन (गमले) के पास कोई ग्रंथ पढ़ते देख पूछा : “कन्या! कौन-सा ग्रंथ पढ़ रही हो?” “एकनाथी भागवत ।” “ग्रंथ तो अच्छा खोजा हैं किंतु उसका भागवत धर्म समझा क्या Read more…

संत गवरीबाई का प्रेरणादायी जीवन

संत गवरीबाई का प्रेरणादायी जीवन और वचन संवत् १८१५ में डूँगरपुर (प्राचीन गिरिपुर) गाँव (राज.) में एक कन्या का जन्म हुआ,नाम रखा गया गवरी । ५-६ साल की उम्र में ही उसका विवाह कर दिया गया । विवाह के एक वर्ष बाद ही उसके पति का देहांत हो गया । Read more…

संयमनिष्ठ सुयशा

संयमनिष्ठ सुयशा अमदावाद की घटित घटना हैः विक्रम संवत् 17 वीं शताब्दी में कर्णावती (अमदावाद) में युवा राजा पुष्पसेन का राज्य था । जब उसकी सवारी निकलती तो बाजारों में लोग कतारबद्ध खड़े रहकर उसके दर्शन करते । जहाँ किसी सुन्दर युवती पर उसकी नजर पड़ती तब मंत्री को इशारा Read more…

हरिभजन परायण कर्मठीबाई

हरिभजन परायण कर्मठीबाई राजस्थान के बागर ग्राम में पुरुषोत्तम ब्राह्मण की इकलौती बेटी थी कर्मठी बाई । वह विवाह नहीं करना चाहती थी परंतु ‘लोग क्या कहेंगे’ – इस डर से माँ-बाप ने उसको धकेल दिया संसार के भोग-विलास से भरे जीवन की ओर । कुछ ही दिनों में कर्मठी Read more…

संत अवैय्यार

संत-वाणी से सहजो बनी महान दिल्ली के परीक्षितपुर नामक स्थान में 25 जुलाई 1725 को चार भाइयों के बाद एक कन्या जन्मी । उसका नाम था सहजो । कन्या के पिता का नाम था हरि प्रसाद और माता का नाम था अनूपी देवी । तब बचपन में ही शादी की Read more…

कर्माबाई की वात्सल्य भक्ति

कर्माबाई की वात्सल्य-भक्ति सर्वान्तर्यामी, घट-घटवासी भगवान न तो धन-ऐश्वर्य से प्रसन्न होते हैं और न ही पूजा के लम्बे-चौड़े विधानों से । वे तो बस, एकमात्र प्रेम से ही संतुष्ट होते हैं एवं प्रेम के वशीभूत होकर नेम (नियम) की भी परवाह नहीं करते । कोई उनका होकर उन्हें पुकारे Read more…