वसंत ऋतुचर्या

वसंत ऋतुचर्या वसंत ऋतु की महिमा के विषय में कवियों ने खूब लिखा है। गुजराती कवि दलपतराम ने कहा हैः           रूडो जुओ आ ऋतुराज आव्यो। मुकाम तेणे वनमां जमाव्यो ।। अर्थात्           देखो, सुंदर यह ऋतुराज आया। आवास उसने वन को Read more…

वसन्त ऋतु में आहार-विहार

वसन्त ऋतु में आहार-विहार आहार – इस ऋतु में कफ को कुपित करने वाले पौष्टिक और गरिष्ठ पदार्थों की मात्रा धीरे-धीरे कम करते हुए गर्मी बढ़ते हुए ही बन्द कर के सादा सुपाच्य आहार लेना शुरु कर देना चाहिए । चरक के सादा सुपाच्य आहार लेना शुरु कर देना चाहिये । चरक के Read more…

ग्रीष्मजन्य व्याधियों के उपाय

ग्रीष्मजन्य व्याधियों के उपाय  सर्वांग दाह :   शतावरी चूर्ण (२ से ३ ग्राम) अथवा शतावरी कल्प (१चम्मच) दूध में लाकर सुबह खाली पेट लें । आहार में दूध-चावल अथवा दूध-रोटी लें । आश्रम द्वारा निर्मित रसायन चूर्ण तथा आवला चूर्ण का उपयोग करें । दोपहर के समय गुलकंद चबा-चबाकर Read more…

वर्षा ऋतुचर्या

वर्षा ऋतुचर्या वर्षा ऋतु में वायु का विशेष प्रकोप तथा पित्त का संचय होता है। वर्षा ऋतु में वातावरण के प्रभाव के कारण स्वाभाविक ही जठराग्नि मंद रहती है, जिसके कारण पाचनशक्ति कम हो जाने से अजीर्ण, बुखार, वायुदोष का प्रकोप, सर्दी, खाँसी, पेट के रोग, कब्जियत, अतिसार, प्रवाहिका, आमवात, Read more…

शरद ऋतुचर्या

शरद ऋतुचर्या भाद्रपद एवं आश्विन ये शरद ऋतु के दो महीने हैं। शरद ऋतु स्वच्छता के बारे में सावधान रहने की ऋतु है अर्थात् इस मौसम में स्वच्छता रखने की खास जरूरत है।रोगाणाम् शारदी माताः।अर्थात् शरद ऋतु रोगों की माता है। शरद ऋतु में स्वाभाविक रूप से ही पित्तप्रकोप होता Read more…

शीत ऋतुचर्या

शीत ऋतुचर्या शीत ऋतु के अंतर्गत हेमंत और शिशिर ऋतु आते हैं। यह ऋतु विसर्गकाल अर्थात् दक्षिणायन का अंतकाल कहलाती है। इस काल में चन्द्रमा की शक्ति सूर्य की अपेक्षा अधिक प्रभावशाली होती है। इसलिए इस ऋतु में औषधियाँ, वृक्ष, पृथ्वी की पौष्टिकता में भरपूर वृद्धि होती है व जीव Read more…

हेमन्त और शिशिर की ऋतुचर्या

हेमन्त और शिशिर की ऋतुचर्या शीतकाल आदानकाल और विसर्गकाल दोनों का सन्धिकाल होने से इनके गुणों का लाभ लिया जा सकता है क्योंकि विसर्गकाल की पोषक शक्ति हेमन्त ऋतु हमारा साथ देती है। साथ ही शिशिर ऋतु में आदानकाल शुरु होता जाता है लेकिन सूर्य की किरणें एकदम से इतनी Read more…

विविध व्याधियों में आहार-विहार

विविध व्याधियों में आहार-विहार तैत्तीरीय उपनिषद के अनुसारः             ‘अन्नं हि भूतानां ज्येष्ठम्-तस्मात् सर्वौषधमुच्यते ।’ अर्थात् भोजन ही प्राणियों की सर्वश्रेष्ठ औषधि है, क्योंकि आहार से ही शरीरस्थ सप्तधातु, त्रिदोष तथा मलों की उत्पत्ति होती है । युक्तियुक्त आहार वायु, पित्त और कफ – इन Read more…

स्वास्थ्य उपयोगी बातें

स्वास्थ्य उपयोगी बातें घी, दूध, मूँग, गेहूँ, लाल साठी चावल, आँवले, हरड़े, शुद्ध शहद, अनार, अंगूर, परवल – ये सभी के लिए हितकर हैं। अजीर्ण एवं बुखार में उपवास हितकर है। दही, पनीर, खटाई, अचार, कटहल, कुन्द, मावे की मिठाइयाँ – से सभी के लिए हानिकारक हैं। अजीर्ण में भोजन Read more…

आयु अनुसार विशेष आहार

आयु अनुसार विशेष आहार शरीर को स्वस्थ व मजबूत बनाने के लिए प्रोटीन्स, विटामिन्स व खनिज (Minerals) युक्त पोषक पदार्थों की आवश्यकता जीवनभर होती है। विभिन्न आयुवर्गों हेतु विभिन्न पोषक तत्त्व जरूरी होते हैं, किस उम्र में कौन-सा तत्त्व सर्वाधिक आवश्यक है यह दिया जा रहा है। जन्म से लेकर Read more…