जब सास बन गयी माँ

जब सास बन गयी माँ एक बुढ़िया का स्वभाव था कि जब तक वह किसी से लड़ न लेती, उसे भोजन नहीं पचता था । बहू घर में आयी तो बुढ़िया ने सोचा, ʹअब घर में ही लड़ लो, बाहर किसलिए जाना ?ʹ अब वह बात-बात पर बहू को जली-कटी सुनातीः “तुम्हारे बाप ने Read more…

ससुराल की रीति

ससुराल की रीति एक लड़की विवाह करके ससुराल आयी । ससुराल में उसकी दादी सास भी थी । लड़की ने देखा कि दादी सास का बड़ा अपमान-तिरस्कार हो रहा है । सास उनको ठोकरें मारती है, अपशब्द सुनाती रहती है, बहुत दुःख देती है । यह देखकर उस लड़की को Read more…

परलोक के भोजन का स्वाद

परलोक के भोजन का स्वाद एक सेठ ने अन्नक्षेत्र खोल रखा था । उनमें दान की भावना तो कम थी पर समाज उन्हें दानवीर समझकर उनकी प्रशंसा करे यह भावना मुख्य थी । उनके प्रशंसक भी कम नहीं थे । थोक का व्यापार था उनका । वर्ष के अंत में Read more…

परस्पर भावयन्तु…

लूट मची, खुशहाली छायी एक धनी सेठ के सात बेटे थे । छः का विवाह हो चुका था । सातवीं बहू आयी, वह सत्संगी माँ-बाप की बेटी थी । बचपन से ही सत्संग में जाने से सत्संग के सुसंस्कार उसमें गहरे उतरे हुए थे । छोटी बहू ने देखा कि Read more…

छोटी बहू

शोषण नहीं पोषण करें प्राचीनकाल में हिम्मतनगर (गुजरात) से आगे रतनपुर नगर में रामराय नाम का एक धनवान सेठ रहता था । एक दिन उसने सोचा, ‘मेरे पास इतनी धन-सम्पत्ति है, राजा साहब यह सम्पत्ति देखें तो उनको भी पता चले कि मैं कोई साधारण आदमी नहीं हूँ ।’ सेठ Read more…

नाराजगी क्यों और किससे

अपने से नाराज हुए बिना दूसरे से नाराजगी सम्भव नहीं एक परिवार में तीन बहुएँ थीं । बड़ी बहू की कोई कितनी ही सेवा करे पर वह हमेशा मुँह फुलाये रहती थी । मँझली बहू किसी आत्मवेत्ता गुरु की शिष्या थी और सत्संग प्रेमी, विवेकी, सेवा भक्तिवाली, उदार एवं शांतिप्रिय थी Read more…