विवाह का प्रयोजन

विवाह का प्रयोजन    हरेक जीव, नर हो या नारी, अनादि काल से वासनाओं से पीड़ित होता आ रहा है । वासना की तुष्टि के लिए वह नये-नये शरीर धारण करता है और रस लेने में प्रयत्नशील रहता है । परंतु इस आनंद-प्राप्ति के प्रयास से ही वह बेचारा अपने Read more…

भारतीय दम्पत्ति सर्वाधिक सुखी क्यों

विश्व भर के दम्पत्तियों में भारतीय दम्पत्ति सर्वाधिक सुखी व संतुष्ट सनातन संस्कृति के दिव्य संस्कारों का प्रभाव देख चकित हुए विश्लेषक कुछ समय पहले मनोवैज्ञानिकों ने ʹप्लेनेट प्रोजेक्टʹ के अऩ्तर्गत इंटरनेट के माध्यम से विश्व भर के दम्पत्तियों के वैवाहिक जीवन का सर्वेक्षण किया । सर्वेक्षण का मुख्य उद्देश्य था ʹकिस देश Read more…

धन्या सा स्त्री…

कौन नारी पृथ्वी को पवित्र करती है ? लज्जा वासो भूषणं शुध्दशीलं पादक्षेपो धर्ममार्गे च यस्या: । नित्यं पत्यु:सेवनं मिष्टवाणी धन्या सा स्त्री पूतयत्येव पृथ्वीम् ।। ‘जिस स्त्री का लज्जा ही वस्त्र एवं विशुद्ध भाव ही भूषण हो, धर्ममार्ग में जिसका प्रवेश हो, मधुर वाणी बोलने का जिसमें गुण हो Read more…

आदर्श गृहस्थ जीवन के सोपान

आदर्श गृहस्थ-जीवन के सोपान सद्गृहस्थ, आदर्श गृहस्थ बनकर जीवन में सद्गति चाहते हो तो घर को, परिवार को अपना मानकर लोभी, मोही, अभिमानी न बनो । घर, परिवार, धन को अपने लिए समझो परंतु अपना न समझो क्योंकि ये सब संसार की वस्तुएँ हैं, तुम्हारी नहीं हैं । जो कुछ Read more…

कला… गृहस्थ-जीवन जीने की

गृहस्थी में रहने की कला जिन बातों को याद करने से तुम्हें चिंता होती है, दुःख होता है या किसीके दोष दीखते हैं, उन्हें विष की नाईं त्याग दो । जिन बातों से तुम्हारा उत्साह, आत्मिक बल बढ़ता है, प्रसन्नता बढ़ती है उनका आदर से चिंतन करो । अपने चित्त Read more…

सुखमय गृहस्थ-जीवन

गृहस्थ में सुखी रहने के उपाय अपनेवालों से न्याय, दूसरे से उदारता- यह सिद्धांत दिलों को व कुटुम्ब को जोड़कर रखता है । ‍‌सासु का कर्तव्य है कि बहुओं को अपने ह्रदय में, अपनी गोद में जगह दे । बहुओं का कर्तव्य है कि सास- ससुर को अपने दिल में Read more…

गृहस्थी का अमृत

गृहस्थी का अमृत ʹस्कन्द पुराणʹ में आया है कि गृहस्थ के घर नौ प्रकार का अमृत सदैव रहना चाहिए, इससे वह सुखी रहता है । ये सभी बिना पैसे के अमृत हैं । पहला – आपके घर कोई भी आ जाय तो उससे मीठे वचन बोलें । दूसरा – सौम्य दृष्टि Read more…

गृहस्थ-जीवन का सार

गृहस्थ-जीवन का यही सार है प्रेम का बाप है विश्वास और विश्वास का बाप है सच्चाई । पति-पत्नी को एक-दूसरे से सच्चाई से पेश आना चाहिए । पत्नी एक बार झूठ बोलेगी, दो बार, पाँच बार, दस बार तो आखिर पति भी तो रोटी खाता है, उसे पता चल जायेगा Read more…

गृहस्थ-जीवन के नियम

संसार-व्यवहार कब न करें ? विवाहित दंपत्ति भी संयम-नियम से रहें, ब्रह्मचर्य का पालन करते हुए रहें । सभी पक्षों की अमावस्या, पूर्णिमा, चतुर्दशी और अष्टमी-इन सभी तिथियों में स्त्री समागम करने से नीच योनि एवं नरकों की प्राप्ति होती है । (महाभारत, अनुशासन पर्व, दानधर्म पर्वः 104.29.30) दिन मेंऔरदोनों Read more…

गर्भाधान संस्कार क्यों

गर्भाधान संस्कार से उत्तम संतान की प्राप्ति शास्त्रो में गर्भाधान संस्कार की जो विधि जो बताई है उसका प्रायः लोप हो जाने के कारण ही आज कुलकलंक तथा देश-विदेश में आतंक पैदा करनेवाली संतानों की उत्त्पति हो रही है । अतः गर्भाधान संस्कार एक महत्वपूर्ण संस्कार है । स्त्री-पुरुष के Read more…