जानिये कैसे बनें व्यवहार-कुशल

व्यवहार-कौशल्य सबसे विनयपूर्वक मीठी वाणी से बोलना । किसीकी चुगली या निंदा नहीं करना । किसीके सामने किसी भी दुसरे की कही हुई ऐसी बात को न कहना, जिससे सुननेवाले के मन में उसके प्रति द्वेष या दुर्भाव पैदा हो या बढ़े । जिससे किसीके प्रति सद्भाव तथा प्रेम बढ़े, Read more…

अभिवादन का रहस्य

‘हाय-हेलो’ से बड़ों का अपमान न करें… हमारी सनातन संस्कृति में माता-पिता तथा गुरूजनों को नित्य चरणस्पर्श करके प्रणाम करने का विधान है । चरणस्पर्श करके प्रणाम न कर सकें तो दोनों हाथ जोड़कर ही नमस्कार करें । कन्याओं को तो किसी भी पुरूष के पैर छूकर प्रणाम करना ही Read more…

धैर्य – परम मित्र

सत्संग करे सुख-दुःख से पार भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं : सुख वा यदि वा दुःखं स योगी परमो मतः । सुखद अवस्था आये चाहे दुःखद अवस्था आये, जो सुख और दुःख से परे मुझ साक्षी में, मुझ आत्मा भें विश्रांति पा लेता है उस योगी की बुद्धि परम बुद्धि है Read more…

यह कैसा मनोरंजन ?

यह कैसा मनोरंजन वर्तमान समय में टी.वी. चैनलों, फिल्मों तथा पत्र-पत्रिकाओं में मनोरंजन के नाम देकर समाज के ऊपर जिसे थोपा जा रहा है, वह मनोरंजन के नाम पर विनाशक ही है ।पत्र-पत्रिकाओं के मुख-पृष्ठों तथा अन्दर के पृष्ठों पर अश्लील चित्रों की भरमार रहती है । इस दिशा में Read more…

नौजवान – भारत की शान

अपने नौ-जवानों को बचाने का प्रयास करें हिन्दुस्तान की मिट्टी में ऐसी खासियत है कि यहाँ कोई भगत सिंह हो जाता है, कोई दयानंद हो जाता है, कोई विवेकानंद हो जाता है । यह इस माटी की खासियत है कि यह माटी कभी वीर विहीन नहीं रही है । हजारों Read more…

मधुर व्यवहार

मधुर व्यवहार कुटुम्ब-परिवार में भी वाणी का प्रयोग करते समय यह आवश्य ख्याल में रखा जाय कि मैं जिससे बात करता हूँ वह कोई मशीन नहीं है, रोबोट नहीं है, लोहे का पुतला नहीं है मनुष्य है । उसके पास दिल है | हर दिल को स्नेह, सहानुभूति, प्रेम और आदर Read more…

वाणी ऐसी बोलिए़

वाणी की चतुराई एक बार किसी ने एक मरने योग्य बूढ़ा हाथी एक गांव में भेजा । साथ में गांववासियों को यह आदेश भी दे डाला कि इस हाथी के स्वास्थ्य की खबर मुझे रोजाना बताई जाए और जो कोई भी ग्रामवासी हाथी मर गया ऐसी सूचना मुझे देगा, उसे Read more…

सत्यं वद, धर्मं चर…

वाणी के गुण वाणी का हमारे जीवन में किस ढंग से प्रयोग हो, किस प्रकार की वाणी का प्रयोग न हो- यह जान लेना और तदनुसार उसका जीवन में प्रयोग करना आवश्यक है । सत्यता, दृढ़ता, मधुरता, संक्षिप्तता, हितकारिता, नम्रता और शिष्टता – यह सात वाणी के गुण हैं । Read more…

बुरा जो देखन मैं चला…

वाणी के दोष (१) कठोरता : गाली, कटु वचन अपनेको प्रिय नहीं होते, कठोर वचन तीर के समान हमारे अंतःकरण में चुभते हैं, इसलिए दूसरे को भी कठोर शब्दों के प्रहार से मत मारो । शस्त्रप्रहार से भी बलवान एवं घातक होता । मनुष्यों को शब्दों की चोट ऐसी लगती Read more…

सुख-दुःख की कुंजी

दुःखी न होना तुम्हारे हाथ की बात ! तुम निंदनीय काम न करो फिर भी अगर निंदा हो जाती है तो घबराने की क्या जरूरत है ? तुम अच्छे काम करो, प्रशंसा होती है तो जिसने करवाया उसको दे दो । बुरे काम हो गये तो प्रायश्चित्त करके रुको लेकिन Read more…