श्री सद्गुरु-स्तुति

सद्गुरु-स्तुति हे सदगुरु तुम परम हितैषी, तुमसे ही कल्याण हमारा | तुम्हें न पाकर व्यर्थ चला जाता, मानव का जीवन सारा | परम सत्य, हे नित्य युक्‍त, हे शुद्ध बुद्ध, हे मुक्त महात्मन् | मन दे पाये जो तुमको ही, उसका सफल हुआ मानव तन | देव तुम्हारे दर्शन करके, Read more…

आरोग्य के मूलभूत सिद्धांत

आरोग्य के मूलभूत सिद्धांत दिवाशयन निशि जागरण, विषमाहार विहार । वेगावेग निरुद्धि से, बने रोग आधार ॥  पीवे अंजलि अष्ट जल, सूर्योदय के पूर्व ।  वात पित्त होवे शमन, उपजे शक्ति अपूर्व ॥  ग्रीष्म वात संचय करे, वर्षा पित्तज स्राव ।   कफ संचय हेमंत ऋतु, ऐसा प्रकृति स्वभाव ॥  Read more…

कितने दिन ?

कितने दिन ? मानव सोचो जग के सुख का, विस्तार रहेगा कितने दिन | सत्कार रहेगा कितने दिन, यह प्यार रहेगा कितने दिन || चाहे पितु हो या माता हो, पत्नी हो सुत या भ्राता हो | जिसको अपना कहते उस पर, अधिकार रहेगा कितने दिन || कोई आता कोई Read more…

अपने स्वरूप को जानो

अपने स्वरूप को जानो शुभ अवसर है तो यह है, जो चाहो लाभ उठाओ । यह व्यर्थ न जाने पाये, निज को निर्दोष बनाओ ।। सत्संग से गति मिलती, हितकर पुनीत मति मिलती। सद्गुरु विवेक मिल जाता, उसको न कही ठुकराओ।। दुख से न डरो जीवन में, प्रभु का आश्रय Read more…

तुम बुद्धिमान मानव जागो

तुम बुद्धिमान मानव जागो शुभ अवसर बीते जाते हैं, तुम बुद्धिमान मानव जागो । अविवेकी देर लगाते है, तुम बुद्धिमान मानव जागो ।। वह महादुःखद अज्ञान निशा, जिसमें न सूझती सत्य दिशा । इसको सब समझ ना पाते है, तुम बुद्धिमान मानव जागो ।। ये झूठे दुःख – सुख के Read more…

तुम हो पथिक साधना पथ में…

तुम हो पथिक साधना पथ में… तुम हो पथिक साधना पथ में, समझ–समझकर पैर बढ़ाना । अविनाशी के सम्मुख होकर, नश्वर में मत प्रीति फंसाना ।। दृढ़ संकल्प और साहस के साथ, प्रेम को पूर्ण बनाकर । आकृति नहीं किंतु तुम अपनी, परम विरागी प्रकृति बनाकर ।। शांत स्वस्थ्य¹ समता Read more…

न भूलो परमेश्वर का ध्यान

न भूलो परमेश्वर का ध्यान न भूलो परमेश्वर का ध्यान, यही तो अपने जीवन के प्राण ।। यह सब संगी कुछ ही दिन के, तुम चल रहे भरोसे जिनके । समझकर यह संभ्रम अज्ञान, न भूलो परमेश्वर का ध्यान ।।… जग के वैभव बल जन धन में, रहना निरासक्त इस Read more…

प्रभो ! अपने मन में बसाऊं तुम्हीं को…

प्रभो अपने मन में बसाऊं तुम्हींको… प्रभो अपने मन में बसाऊं तुम्हींको । हृदय में हृदय धन बिठाऊं तुम्हींको ।। यही एक स्वीकार मेरी विनय हो । विमल हो मलिन मन सदा ध्यान लय हो ।। तुम्हींमें हमारा ये जीवन अभय हो । स्वाचित्त चेतना वृत्ति मति प्रेममय हो ।। Read more…

ब्रह्मचर्य, संयम है बड़ा निराला

ब्रह्मचर्य, संयम है बड़ा निराला ब्रह्मचर्य संयम बड़ा निराला, सद्गुण सद्भाव बढ़ानेवाला, न भय, कमजोरी मन में, यौवन-धन का है रखवाला । संयम से होता मन निश्चल, बढ़े ओज-तेज, बुद्धि-मनोबल, स्वस्थ, शांत चित्त, तन मन निर्मल, जीवन बगिया मेहकानेवाला ।। सदाचार सुमति से बढ़े योग्यता, संकल्प अचल हो मिले सफलत, Read more…

स्त्री… सुखी जीवन का आधार

स्त्रियाँ कुछ भी बर्बाद, नही होने देतीं। वो सहेजती हैं, संभालती हैं। ढकती हैं, बाँधती हैं। उम्मीद के आख़िरी छोर तक। कभी तुरपाई कर के, कभी टाँका लगा के। कभी धूप दिखा के, कभी हवा झला के। कभी छाँटकर, कभी बीनकर। कभी तोड़कर, कभी जोड़कर। देखा होगा ना ? अपने ही Read more…