प्राणायाम परिचय व उसके लाभ

जानें प्राणायाम व उसके लाभ   प्राणायाम प्राणायाम शब्द का अर्थ हैः प्राण+आयाम । प्राण अर्थात् जीवनशक्ति और आयाम अर्थात नियमन । श्वासोच्छ्वास की प्रक्रिया का नियमन करने का कार्य़ प्राणायाम करता है । प्राणायाम–परिचय   पृथ्वी, जल, तेज, वायु, आकाश – इन पाँच तत्त्वों से यह शरीर बना है । इसका Read more…

अनुलोम-विलोम प्राणायाम

अनुलोम-विलोम प्राणायाम इस प्राणायाम में सर्वप्रथम दोनों नथुनों से पूरा श्वास बाहर निकाल दें । इसके बाद दाहिने हाथ के अँगूठे से नाक के दाहिने नथुने को बन्द करके बाँए नथुने से सुखपूर्वक दीर्घ श्वास लें । अब यथाशक्ति श्वास को रोके रखें । फिर बाँए नथुने को मध्यमा अँगुली Read more…

ऊर्जायी प्राणायाम

ऊर्जायी प्राणायाम इसको करने से हमें विशेष ऊर्जा (शक्ति) मिलती है, इसलिए इसे ऊर्जायी प्राणायाम कहते हैं । विधि –  पद्मासन या सुखासन में बैठ कर गुदा का संकोचन करके मूलबंध लगाएं । फिर नथुनों, कंठ और छाती पर श्वास लेने का प्रभाव पड़े उस रीति से जल्दी श्वास लें । Read more…

भ्रामरी प्राणायाम

भ्रामरी प्राणायाम स्मरणशक्ति और बौद्धिक शक्ति बढ़ाने हेतु नित्य  भ्रामरी प्राणायाम का अभ्यास चाहिए  । परिचयः  स्मरणशक्ति तथा बौद्धिक शक्तियों को विकसित करने के लिए यह सर्वसुलभ व बहु-उपयोगी प्राणायाम है । इस प्राणायाम में भ्रमर अर्थात् भँवरे की तरह गुंजन करना होता है इसीलिए इसका नाम भ्रामरी प्राणायाम रखा Read more…

संस्कृति रक्षक प्राणायाम

संस्कृति रक्षक प्राणायाम गहरा श्वास लेकरर ॐकार का जप करें, आखिर में ‘म’ को घंटनाद की नाईं गूँजने दें। ऐसे 11 प्राणायाम फेफड़ों की शक्ति बढ़ायेंगे, रोगप्रतिकारक शक्ति तो बढ़ायेंगे साथ ही वातावरण में भी भारतीय संस्कृति की रक्षा में सफल होने की शक्ति अर्जित करने का आपके द्वारा महायज्ञ Read more…

त्रिबन्ध प्राणायाम

त्रिबन्ध प्राणायाम ध्यान दें- विशेष ध्यान देने की बात है कि मूलबंध (गुदा का संकोचन करना), उड्डीयानबंध (पेट को अंदर की ओर सिकोड़कर ऊपर की ओर खींचना) एवं जालंधरबंध (ठोढ़ी को कंठकूप से लगाना) – इस तरह से त्रिबंध करके यह प्राणायाम करने से अधिक लाभदायक सिद्ध होता है । प्रातःकाल ऐसे 5 Read more…

केवली कुम्भक प्राणायाम

केवली कुम्भक प्राणायाम केवल या केवली कुम्भक का अर्थ है रेचक-पूरक बिना ही प्राण का स्थिर हो जाना । जिसको केवली कुम्भक सिद्ध होता है उस योगी के लिए तीनों लोक में कुछ भी दुर्लभ नहीं रहता । कुण्डलिनी जागृत होती है, शरीर पतला हो जाता है, मुख प्रसन्न रहता Read more…

जलनेति

जलनेति विधिः एक लिटर पानी को गुनगुना सा गरम करें । उसमें करीब दस ग्राम शुद्ध नमक डालकर घोल दें । सैन्धव मिल जाये तो अच्छा । सुबह में स्नान के बाद यह पानी चौड़े मुँहवाले पात्र में, कटोरे में लेकर पैरों पर बैठ जायें । पात्र को दोनों हाथों Read more…

गजकरणी

गजकरणी विधिः करीब दो लिटर पानी गुनगुना सा गरम करें । उसमें करीब 20 ग्राम शुद्ध नमक घोल दें । सैन्धव मिल जाये तो अच्छा है । अब पंजों के बल बैठकर वह पानी गिलास भर-भर के पीते जायें । खूब पियें । अधिकाअधिक पियें । पेट जब बिल्कुल भर Read more…

अग्निसार क्रिया

अग्निसार क्रिया अग्नाशय को प्रभावित करने वाली यह योग की प्राचीन क्रिया लुप्त हो गयी थी । घेरण्ड ऋषि पाचन-प्रणालि को अत्यधिक सक्रिय रखने के लिए यह क्रिया करते थे । इस क्रिया से अनेक लाभ साधक को बैठे-बैठे मिल जाते हैं । विधिः वज्रासन में बैठकर हाथों को घुटनों Read more…