शरीर की जैविक घड़ी पर आधारित दिनचर्या

शरीर की जैविक घड़ी पर आधारित दिनचर्या हमारे ऋषियों, आयुर्वेदाचार्य ने जो जल्दी सोने-जागने एवं आहार-विहार की बातें बतायी है, उन पर अध्ययन व खोज करके आधुनिक वैज्ञानिक और चिकित्सक अपनी भाषा में उसका पुरजोर समर्थन कर रहे हैं । मनुष्य के शरीर में करीब ६० हजार अरब से एक Read more…

दंत-सुरक्षा के उपाय

दंतधावन व दंत-सुरक्षा   मौन रहकर नित्य दंतधावन करे। दंतधावन किये बिना देवपूजा व संध्यान करे। (महाभारत, अनुशासन पर्व) बेर की दातुन करने से स्वर मधुर होता है, गूलर से वाणी शुद्ध होती है, नीम से पायरिया आदि रोग नष्ट होते हैं एवं बबूल की दातुन करने से दाँतों का हिलना Read more…

प्रातः-जागरण

बापू जी ने प्रातः-जागरण को साधनामय बनाना सिखाया हमारी दिनचर्या का प्रारम्भ प्रातः ब्राह्ममुहूर्त में जागरण से होता है।  शास्त्रों की आज्ञा हैः ब्राह्मे मुहूर्ते बुध्यते। ‘प्रातःकाल ब्राह्ममुहूर्त में उठना चाहिए।’ ब्राह्ममुहूर्त में उठने की महिमा बताते हुए पूज्य बापू जी कहते हैं-“जो सूर्योदय से पहले (ब्राह्ममुहूर्त में) शय्या त्याग देता Read more…

प्रातःकालीन भ्रमण

प्रातःकालीन भ्रमण क्यों है लाभकारी ? प्रातः एवं सायं भ्रमण उत्तम स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभप्रद है । पशुओं का राजा सिंह सुबह 3.30 से 5 बजे के दौरान अपने बच्चों के साथ उठकर गुफा से बाहर निकल के साफ हवा में भ्रमण कर आसपास की किसी ऊँची टेकरी पर Read more…

शौच-विज्ञान

क्या है शौच-विज्ञान का रहस्य   शौच का अर्थ है शुद्धि। शुद्धि दो प्रकार की होती हैः आंतर शुद्धि और बाह्य शुद्धि। बाह्य शुद्धि तो साबुन,  उबटन, पानी से होती है और आंतर शुद्धि होती है राग, द्वेष, वासना आदि के अभाव से। जिनकी बाह्य शुद्धि होती है, उनको आंतर Read more…

पुण्यदायी स्नान

पुण्यदायी स्नान पाश्चात्य अंधानुकरण के प्रभाव से लोग स्नान की महत्ता भूलते जा रहे हैं। इससे तमोगुण की वृद्धि हुई है और लड़ाई-झगड़ा, अशांति आदि समस्याओं ने घर लिया है। समस्याओं से निजात दिलाने हेतु बापू जी ने स्नान की महिमा बताते हुए स्नान का सुंदर तरीका भी बताया हैः “शास्त्रों Read more…

तिलक लगाने के लाभ

तिलक और त्रिकाल संध्या ललाट पर दोनों भौहों के बीच विचार शक्ति का केन्द्र है । योगी इसे’आज्ञाचक्र’कहते हैं । इसे शिवनेत्र अर्थात् कल्याणकारी विचारों का केन्द्र भी कहा जाता है । ललाट पर तिलक करने से आज्ञाचक्र और उसके नजदीक की शीर्ष (पीनियल) और पीयूष (पिट्यूटरी) ग्रंथियों को पोषण Read more…

भोजन के नियम क्यों आवश्यक

भोजन के नियम क्यों आवश्यक अधिकांश लोग भोजन की सही विधि नहीं जानते। गलत विधि से गलत मात्रा में अर्थात् आवश्यकता से अधिक या बहुत कम भोजन करने से या अहितकर भोजन करने से जठराग्नि मंद पड़ जाती है, जिससे कब्ज रहने लगता है। तब आँतों में रूका हुआ मल Read more…

निद्रा और स्वास्थ्य

निद्रा और स्वास्थ्य जब आँख, कान, आदि ज्ञानेन्द्रियाँ और हाथ, पैर आदि कर्मेन्द्रियाँ तथा मन अपने-अपने कार्य में रत रहने के कारण थक जाते हैं, तब स्वाभाविक ही नींद आ जाती है। जो लोग नियत समय पर सोते और उठते हैं, उनकी शारीरिक शक्ति में ठीक से वृद्धि होती है। Read more…

प्रसन्नता और हास्य

प्रसन्नता और हास्य प्रसादे सर्वदुःखानां हानिरस्योपजायते। प्रसन्नचेतसो ह्याशु बुद्धिः पर्यवतिष्ठते।। ‘अंतःकरण की प्रसन्नता होने पर उसके(साधक के) सम्पूर्ण दुःखों का अभाव हो जाता है और उस प्रसन्न चित्तवाले कर्मयोगी की बुद्धि शीघ्र ही सब ओर से हटकर एक परमात्मा में ही भलीभाँति स्थिर हो जाती है।’ (गीताः 2.65) खुशी जैसी खुराक Read more…