प्राणायाम परिचय व उसके लाभ

जानें प्राणायाम व उसके लाभ   प्राणायाम प्राणायाम शब्द का अर्थ हैः प्राण+आयाम । प्राण अर्थात् जीवनशक्ति और आयाम अर्थात नियमन । श्वासोच्छ्वास की प्रक्रिया का नियमन करने का कार्य़ प्राणायाम करता है । प्राणायाम–परिचय   पृथ्वी, जल, तेज, वायु, आकाश – इन पाँच तत्त्वों से यह शरीर बना है । इसका Read more…

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गौ- महिमा

गाय की महिमा और परम आवश्यकता गाय की महत्ता और आवश्यकता परमात्मा की अनुपम कृति व सनातन संस्कृति की अनमोल धरोहर है देशी गाय, जो मनुष्य को सभी प्रकार से पोषण देने व उन्नत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है । जहाँ एक ओर गाय का दूध, दही, घी, गौमूत्र Read more…

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क्या है स्वाध्याय ? आत्मसाक्षात्कारी ज्ञानीजनों द्वारा रचित आध्यात्मिक शास्त्रों एवं पुस्तकों का अध्ययन ‘स्वाध्याय’ कहलाता है । पवित्र ग्रंथों का दैनिक पारायण स्वाध्याय है । यह राजयोग के नियम का चौथा अंग है । आत्मस्वरूप के विश्लेषण को या ‘मैं कौन हूँ ?’ के ज्ञान को ही स्वाध्याय की Read more…

ajapa jap

अजपाजप प्रतिजैविक औषध (एंटीबायोटिक) और पेनकिलर, क्या-क्या खाने के बाद भी लोग तंदुरुस्त दिखाई नहीं देते । क्या-क्या मनौतियों के बाद भी लोग निश्चिंत नहीं दिखाई देते । कितने-कितने उपायों के बाद भी लोग पूरे आनंदित नहीं दिखाई देते । क्या-क्या देश-विदेश की यात्राएँ और आविष्कार करने के बाद भी Read more…

Meditation

ध्यान महिमा   ध्यान का मतलब क्या ?   ध्यान है डूबना । ध्यान है आत्म-निरीक्षण करना… ‘हम कैसे है’ यह देखना… ‘कहाँ तक पहुंचे है’ यह देखना… ‘कितना अपने-आपको भूल पाये है’ यह देखना… ‘कितना विस्मृतियोग में डूब पाये है’ यह देखना… ध्यान अर्थात् न करना… कुछ भी न Read more…

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यौगिक चक्र चक्रः चक्र आध्यात्मिक शक्तियों के केन्द्र हैं । स्थूल शरीर में ये चक्र चर्मचक्षुओं से नहीं दिखते हैं । क्योंकि ये चक्र हमारे सूक्ष्म शरीर में होते हैं । फिर भी स्थूल शरीर के ज्ञानतंतुओं-स्नायुकेन्द्रों के साथ समानता स्थापित करके उनका निर्देश किया जाता है । हमारे शरीर Read more…

पहले साइंस या पहले ईश्वर ?

पहले साइंस या पहले ईश्वर ? एक दिन श्रीरामकृष्ण परमहंस के दर्शन हेतु प्रसिद्ध विद्वान बंकिमचन्द्र चटर्जी पधारे थे । रामकृष्ण जी ने भक्तों को उपदेश देते हुए कहाः “कोई-कोई समझते हैं कि बिना शास्त्र पढ़े अथवा पुस्तकों का अध्ययन किये ईश्वर को प्राप्त नहीं किया जा सकता । वे Read more…

आनंदीबाई की दृढ़ श्रद्धा

आनंदीबाई की दृढ़ श्रद्धा एक पंजाबी महिला का नाम था आनंदीबाई । देखने में तो वह इतनी कुरूप थी कि देखकर लोग डर जायें । उसका विवाह हो गया । विवाह से पूर्व उसके पति ने उसे नहीं देखा था । विवाह के पश्चात् उसकी कुरूपता को देखकर वह उसे Read more…

अद्भुत आभा संपन्न रानी कलावती

‘स्कन्द पुराण’ के ब्रह्मोत्तर खंड में कथा आती है कि ‘काशीनरेश की कन्या कलावती के साथ मथुरा के दाशार्ह नामक राजा का विवाह हुआ । विवाह के बाद राजा ने रानी को अपने पलंग पर बुलाया लेकिन उसने इन्कार कर दिया । तब राजा ने बल प्रयोग की धमकी दी । Read more…

भक्तिदात्री पाँच नारियाँ

‘श्रीमद्‌ भागवत’ में पाँच महान महिलाओं की बात आती है : पहली भक्त महिला है द्रौपदी । द्रौपदी भगवान को बोलती है : “प्रभु ! आपको मेरी सहायता में रहना ही पड़ेगा क्योंकि आप मेरे सखा हों, मेरे संबंधी हों, मेरे स्वामी भी हों और मेरे सर्वस्व हो । मैं Read more…