Power of Silence

मौनः शक्तिसंचय का महान स्रोत मौन शब्द की संधि विच्छेद की जाय तो म+उ+न होता है । म= मन, उ = उत्कृष्ट और न = नकार । मन को संसार की ओर उत्कृष्ट न होने देना और परमात्मा के स्वरूप में लीन करना ही वास्तविक अर्थ में मौन कहा जाता Read more…

Trataka

बाह्य धारणा (त्राटक) परमात्मा अचल, निर्विकार, अपरिवर्तनशील और एकरस हैं । प्रकृति में गति, विकार, निरंतर परिवर्तन है । मानव उस परमात्मा से अपनी एकता जानकर प्रकृति से पार हो जाये इसलिए परमात्म-स्वरूप के अनुरूप अपने जीवन में दृष्टि व स्थिति लाने का प्रयास करना होगा । प्रकृति के विकारों Read more…

Omkar gunjan

ॐ कार का अर्थ एवं महत्त्व ॐ = अ+उ+म+(ँ) अर्ध तन्मात्रा । ॐ का अ कार स्थूल जगत का आधार है । उ कार सूक्ष्म जगत का आधार है । म कार कारण जगत का आधार है । अर्ध तन्मात्रा (ँ) जो इन तीनों जगत से प्रभावित नहीं होता बल्कि Read more…

jap

जप महिमा भगवान श्रीकृष्ण ने गीता में कहा है, यज्ञानाम् जपयज्ञो अस्मि । यज्ञों में जपयज्ञ मैं हूँ । श्री राम चरित मानस में भी आता हैः कलियुग केवल नाम आधारा, जपत नर उतरे सिंधु पारा । इस कलयुग में भगवान का नाम ही आधार है । जो लोग भगवान के नाम Read more…

trikal sandhya

तेजस्वी जीवन की कुंजीः त्रिकाल-संध्या त्रिकाल संध्या अर्थात् क्या – प्रातः सूर्योदय के 10 मिनट पहले से 10 मिनट बाद तक, दोपहर के 12 बजे से 10 मिनट पहले से 10 मिनट बाद तक एवं शाम को सूर्यास्त के 10 मिनट पहले से 10 मिनट बाद तक का समय संधिकाल Read more…