कुछ उपयोगी बातें

कुछ उपयोगी बातें आरती के समय कपूर जलाने का विधान है । घर में नित्य कपूर जलाने से घर का वातावरण शुद्ध रहता है, शरीर पर बीमारियों का आक्रमण आसानी से नहीं होता, दुःस्वप्न नहीं आते और देवदोष तथा पितृदोषों का शमन होता है । कपूर मसलकर घर में (खासकर Read more…

ग्रहण में क्या करें, क्या न करें ?

ग्रहण में क्या करें, क्या न करें ? चन्द्रग्रहण और सूर्यग्रहण के समय संयम रखकर जप-ध्यान करने से कई गुना फल होता है। श्रेष्ठ साधक उस समय उपवासपूर्वक ब्राह्मी घृत का स्पर्श करके‘ॐ नमो नारायणाय‘मंत्र का आठ हजार जप करने के पश्चात् ग्रहणशुद्धि होने पर उस घृत को पी ले। Read more…

धन-सम्पत्ति के लिए क्या करें ?

धन-सम्पत्ति के लिए क्या करें ? घर के अंदर, लक्ष्मी जी बैठी हों ऐसा फोटो रखना चाहिए और दुकान के अंदर, लक्ष्मी जी खड़ी हों ऐसा फोटो रखना चाहिए। ईशान कोण में तुलसी का पौधा लगाने से तथा पूजा के स्थान पर गंगाजल रखने से घर में लक्ष्मी की वृद्धि Read more…

एक्यूप्रेशर बिन्दु

एक्यूप्रेशर बिन्दु सूर्य बिन्दुःसूर्यबिन्दु छाती के परदे (डायाफ्राम) के नीचे आये हुए समस्त अवयवों का संचालन करता है। नाभि खिसक जाने पर अथवा डायाफ्राम के नीचे के किसी भी अवयव के ठीक से कार्य न करने पर सूर्यबिन्दु पर दबाव डाला जाना चाहिए। शक्तिबिन्दुःजब बहुत थकान हो या रात्रि को Read more…

बीजमंत्रों द्वारा स्वास्थ्य-सुरक्षा

बीजमंत्रों के द्वारा स्वास्थ्य-सुरक्षा भारतीय संस्कृति ने आध्यात्मिक विकास के साथ शारीरिक स्वास्थ्य को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया है । हर रोग के मूल में पाँच तत्व यानी पृथ्वी, जल, तेज, वायु और आकाश की ही विकृति होती है । मंत्रों के द्वारा इन विकृतियों को आसानी से दूर करके Read more…

मंत्र मंजूषा

मंत्र मंजूषा   दु:स्वप्ननाशक मंत्र :- ‘श्रीविष्णुसहस्त्रनाम, गजेन्द्रमोक्ष, दुर्गा सप्तशती’ आदि का पाठ दु: स्वप्ननाशक होता है  । ॐ ह्रीं श्रीं क्लिं दुर्गतिनाशिन्यै महामायायै स्वाहा  । इस मंत्र को पवित्र होकर १० बार जपने से दु: स्वप्न सुखप्रद हो जाता है  । (ब्रह्मवैवर्त पुराण, श्रीकृष्णजन्म खं., उत्तरार्ध: ८२.५२) आसुरी वृत्तियों Read more…

नीतिज्ञान

नीतिज्ञान भगवान ब्रह्माजी के तीसरे मानसपुत्र भृगु के पुत्र महर्षि शुक्राचार्य ने नीतियों में श्रेष्ठ नीतिशास्त्र को कहा, जिसे भगवान ब्रह्मा ने लोकहितार्थ पूर्व में ही शुक्राचार्य से कहा था। इस’शुक्रनीति’ के वचन प्रत्येक जटिल परिस्थिति में सुपथ दिखाने वाले, समाज को एक नयी दिशा प्रदान करने वाले हैं। गुरुजनों के Read more…