नारी में श्रद्धा-विश्वास अधिक क्यों ?

नारी में श्रद्धा-विश्वाश क्यों अधिक है ? सूर्य स्थावर जंगम जगत की आत्मा है । सूर्य और चंद्र दोनों माया विशिष्ट ब्रह्म के नेत्र हैं । जिनके द्वारा ही जड़ चेतन जगत को जीवन मिलता है । स्त्री पार्थिव तत्व द्वारा इस जीवन को प्राप्त करती है और पुरुष अपने Read more…

लज्जा – स्त्री का भूषण

नारी-स्वातंत्र्य के विषय में कुछ मंतव्य ‘The flower of femininity blossoms only in the shade’ ‘नारी एक ऐसा पुष्प है जो छाया (घर) में ही अपनी सुगंध फैलाता है ।’ – लेमेनिस ‘Flower with the loveliest perfume are delicately attractive’ ‘श्रेष्ठ गंधवाला पुष्प लजीला और चित्ताकर्षक होता है ।’ – Read more…

सुरक्षा का साधन

युग के विनाशकारी प्रभाव से बचाकर विद्यार्थियों को महान ऊँचाई पर कैसे पहुँचायें ? प्राचीन काल में भारत की शिक्षण प्रणाली ऐसी थी कि विद्यार्थी 5 साल की उम्र से गुरुकुल में प्रवेश पाता और 15 साल तक उसको ऐसे संयमी और सादा जीवन बिता के इहलोक और परलोक में Read more…

आत्मबल जगाओ

आत्मबल जगाओ नारी शरीर मिलने से अपने को अबला मानती हो ? लघुताग्रन्थि में उलझकर परिस्थितियों में पीसी जाती हो ? अपना जीवन दीन-हीन बना बैठी हो ? तो अपने भीतर सुषुप्त आत्मबल को जगाओ । शरीर चाहे स्त्री का हो या पुरुष का । प्रकृति के साम्राज्य में जो Read more…