वास्तव में प्रकृति और हम एक-दूसरे से जुड़े हैं । हम जो श्वास छोड़ते हैं वह वनस्पतियाँ लेती हैं और वनस्पतियाँ जो श्वास छोड़ती हैं वह हम लेते हैं । हमारे भाई-बंधु हैं वनस्पतियाँ ।
हम एक दिन में लगभग 1-1.5 किलो भोजन करते हैं, 2-3 लीटर पानी पीते हैं लेकिन 21600 श्वास लेते हैं । उसमें 11 हजार लीटर हवा लेते छोड़ते हैं, जिससे हमें 10 किलो भोजन का बल मिलता है । अब यह वायु जितनी गंदी (प्रदूषित) होती है, उतना ही लोगों का (वायुरूपी) भोजन कमजोर होता है तो स्वास्थ्य भी कमजोर होता है । अतः नीम, पीपल, आँवला, तुलसी वटवृक्ष और दूसरे जो भी पेड़ हितकारी हैं वे लगाएँ और हानिकारक पेड़-नीलगिरी, अंग्रेजी बबूल व गाजर-घास हटाएँ ।
“नीलगिरी और बबूल (कीकर) हटाओ (ये वृक्षवायु को गंदा करते हैं, जीवनीशक्ति हरते हैं), पीपल,तुलसी, नीम, आँवला बढ़ाओ। ये वृक्ष लगाने सेआपके द्वारा प्राणिमात्र की बड़ी सेवा होगी। खुद वृक्षलगाना और दूसरों को प्रेरित करना भी एक सेवा है।हमने पहाड़ी खरीद के पर्यावरण की सेवा में पचासोंहजार पेड़ लगाये हैं। राष्ट्रीय कर्तव्य है पर्यावरण के लिए पेड़ लगाना। हम पेड़ को प्रेम करते हैं और पेड़ हमारे स्वास्थ्य के लिए और पर्यावरण के लिए वरदान हैं, आशीर्वाद हैं।”
पूज्य गुरुदेव के इन्हीं वचनों का अनुसरण करते हुए महिला उत्थान मंडल द्वारा समय-समय पर पर्यावरण सुरक्षा अभियान किया जाता है ।