अहिरसि आयुरसि सर्वतः प्रतिष्ठासि धाता । त्वां दधातु विधाता त्वां दधातु ब्रह्मवर्चसा भवेति।।
ब्रह्मा बृहस्पतिर्विष्णुः सोम सूर्यस्तथाऽश्विनौ। भगोऽथ मित्रावरूणौ वीरं ददतु मे सुतम्।।
हे गर्भ ! तुम सूर्य के समान हो। तुम मेरी आयु हो, तुम सब प्रकार से मेरी प्रतिष्ठा हो। धाता (सबके पोषक ईश्वर) तुम्हारी रक्षा करें, विधाता (विश्व के निर्माता ब्रह्मा) तुम्हारी रक्षा करें। तुम ब्रह्मतेज से युक्त होओ।