कोई भी मनुष्य बुरा नहीं है । जाने-अनजाने, परिस्थितिवश आत्मनियंत्रण खो देने के कारण भी लोग गलती कर बैठते हैं । लेकिन सही समय पर यदि उचित मार्गदर्शन प्राप्त हो जाए तो वो अपने जीवन को सही दिशा में मोड़ सकते हैं । ऐसे कई प्रसंग हमारे प्राचीन धर्मग्रंथों में देखने को जैसे है । जैसे वालिया लुटेरा जो आगे चलकर वाल्मीकि ऋषि के नाम से प्रसिद्ध हुए, अंगुलिमाल जो महात्मा बुद्ध के सम्पर्क में आकर महान हो गए, अजामिल जिन्होेंने संत की कृपा से सद्गति प्राप्त की । हमारे संतों-महापुरुषों की इसी धरोहर को पुनः मूर्तरूप देते हुए पूज्य संत श्री आशारमजी बापू की पावन प्रेरणा से गत कई वर्षों से महिला उत्थान मंडल द्वारा कैदी उत्थान कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता रहा है । इस अभियान का यही उद्देश्य है कि कैदी भाई-बहनों में सकारात्मक मानस परिवर्तन हो, वे भविष्य में सत्मार्ग पर अग्रसर होते हुए समाज में अपना कर्तव्य निभायें एवं एक प्रमाणिक नागरिक की तरह जीवनयापन करें ।