पाश्चात्य कल्चर के प्रवाह में भ्रमित हो रही युवतियों को इसअभियान के अंतर्गत प्रेजेंटेशन, वक्तव्य तथा योगाभ्यास जैसे विभिन्न प्रात्यशिक प्रयोगों के माध्यम से मनोबल, प्राणबल, बुद्धिबल को जागृत करने, ओजस्वी-तेजस्वी बनने तथा तनावरहित जीवन जीने की कुंजियाँ दी जाती है ।
तेज, ओज, सकारात्मकता, आत्मविश्वास, मनोबल, आत्मबल आदि से पूर्ण व्यक्तित्व को तेजस्वी शब्द से विभूषित किया जाता है । और जब यही सद्गुण किसी कन्या में होते हैं तब वो कहलाती है तेजस्विनी । कोई वैज्ञानिक नहीं बता सकता कि एक बीज कितने और नए वृक्षों को जन्म देगा.. वैसे ही कोई नहीं जान सकता कि साधारण सा दिखने वाला व्यक्ति भी यदि अपनी सुषुप्त शक्तियों को जगा ले तो वो कितना महान बन सकता है ।
जिस प्रकार हर बीज में वृक्ष छिपा है, उसी प्रकार हर व्यक्ति में महानता छिपी है… हर कन्या में तेजस्विनी छिपी है…
और तेजस्विनी अभियान का उद्देश्य हर कन्या में छिपी तेजस्विनी को जागृत करना है… उन्हें उनका सच्चा स्वरूप दिखाना है ।
हे भारत की कन्याओं… तुममें अथाह सामर्थ्य भरा है, अपने सच्चे स्वरुवप को पहचानो… अपने जीवन को संयम, सादगी, सौम्यता, उदारता, सहनशीलता,सरलता, शौर्य, सुचिता, धैर्य, विनम्रता आदि दैवी गुणों व सकारात्मक विचारों से परिपूर्ण कर दिव्यता की अग्रसर हो जाओ… खुलने दो तेजस्वी जीवन का द्वार ताकि तुम भी कहलाओ… तेजस्विनी…