
ललाट पर दोनों भौहों के बीच विचार शक्ति का केन्द्र है । योगी इसे’आज्ञाचक्र’कहते हैं । इसे शिवनेत्र अर्थात् कल्याणकारी विचारों का केन्द्र भी कहा जाता है । ललाट पर तिलक करने से आज्ञाचक्र और उसके नजदीक की शीर्ष (पीनियल) और पीयूष (पिट्यूटरी) ग्रंथियों को पोषण मिलता है । यह बुद्धिबल व सत्त्वबलवर्धक है तथा विचारशक्ति को भी विकसित करता है । अतः तिलक लगाना आध्यात्मिक तथा वैज्ञानिक – दोनों दृष्टिकोणों से बहुत लाभदायक है । कोई भी शुभ कार्य करते समय ललाट पर तिलक करें ।
स्नानं दानं तपो होमो देवता पितृकर्म च । तत्सर्वं निष्फलं यादि ललाटे तिलकं विना । ।
‘बिना तिलक लगाये स्नान, दान, तप, हवन, देवकर्म, पितृकर्म – सब कुछ निष्फल हो जाता है ।’
किस उँगली से तिलक करें ?
अंगुष्ठः पुष्टिदः प्रोक्ता तर्जनी मोक्षदायिनी । ।
अनामिका से तिलक करने से सुख-शांति, मध्यमा से आयु, अँगूठे स्वास्थ्य और तर्जनी से मोक्ष की प्राप्ति होती है ।”
किससे तिलक करें ?

गोष्पदाक्तमृदा यो हि तिलकं कुरुते नरः ।
तीर्थस्नातो भवेत्सद्यो जयस्तस्य पदे पदे । ।
महिलाओं को तिलक करने हेतु प्रेरित किया
प्लास्टिक की बिंदियों से किया सावधान

यही मेरी गुरुदक्षिणा है