श्राद्ध

पितरों की तृप्ति व प्रसन्नता हेतु करणीय – श्राद्ध श्रद्धया दीयते यत्र तच्छ्राद्धं परिचक्षते । ‘श्रद्धा से जो पूर्वजों के लिए किया जाता है, उसे ‘श्राद्ध’ कहते हैं ।’ ‘पद्म पुराण’ में आता हैः ‘श्राद्ध से प्रसन्न हुए पितर आयु, पुत्र, धन, विद्या, राज्य, लौकिक सुख, स्वर्ग तथा मोक्ष भी Read more…

गंगा की महिमा

गंगा की महिमा   शास्त्रों ने गाई माँ गंगा की महिमा संत तुलसीदासजी कहते हैं : गंग सकल मुद मंगल मूला । सब सुख करनि हरनि सब सूला ।। (श्रीरामचरित. अयो. कां. : 86.2) सभी सुखों को देनेवाली और सभी शोक व दुःखों को हरनेवाली माँ गंगा के तट पर Read more…

अदभुत है गीता ग्रंथ !

अदभुत है गीता ग्रंथ ! अगर विश्व में कोई आश्वासन देने वाला ग्रंथ है तो वह है भगवद्गीता । सारे वेदों का, उपनिषदों का अमृत सरल भाषा में जिस ग्रंथ में है और जो सभी तक पहुँचे ऐसा ग्रंथ है श्रीमद्भगवदगीता । श्रीकृष्ण ने प्रेमाभक्ति का दान देकर अंदर की Read more…

प्राणशक्तिवर्धक प्रयोग

प्राणशक्तिवर्धक प्रयोग अपनी प्राणशक्ति को बढ़ाने के इच्छुक लोगों को नित्य प्राणशक्तिवर्धक प्रयोग करना चाहिए । परिचयः इससे प्राणशक्ति का अदभुत विकास होता है। अतः इसे प्राणशक्तिवर्धक प्रयोग कहते हैं। लाभः इससे हमारी नाभि के नीचे जो स्वाधिष्ठान केन्द्र है, उसे जागृत होने में खूब मदद मिलती है। स्वाधिष्ठान केन्द्र जितना सक्रिय Read more…

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बुद्धिशक्तिवर्धक – मेधाशक्तिवर्धक प्रयोग

बुद्धिशक्तिवर्धक – मेधाशक्तिवर्धक प्रयोग   बुद्धिशक्ति वर्धक प्रयोग    लाभ – इसके नियमित अभ्यास से ज्ञानतंतु पुष्ट होते हैं। चोटी के स्थान के नीचे गाय के खुर के आकार वाला बुद्धिमंडल है, जिस पर इस प्रयोग का विशेष प्रभाव पड़ता है और बुद्धि व धारणा शक्ति का विकास होता है।विधिः सीधे Read more…

सूर्योपासना अर्थात् क्या

सूर्योपासना की आवश्यकता क्यों ? सूर्य एक शक्ति है । भारत में तो सदियों से सूर्य की पूजा होती आ रही है । सूर्य तेज और स्वास्थ्य के दाता माने जाते हैं । यही कारण है कि विभिन्न जाति, धर्म एवं सम्प्रदाय के लोग दैवी शक्ति के रूप में सूर्य Read more…

प्राणायाम परिचय व उसके लाभ

जानें प्राणायाम व उसके लाभ   प्राणायाम प्राणायाम शब्द का अर्थ हैः प्राण+आयाम । प्राण अर्थात् जीवनशक्ति और आयाम अर्थात नियमन । श्वासोच्छ्वास की प्रक्रिया का नियमन करने का कार्य़ प्राणायाम करता है । प्राणायाम–परिचय   पृथ्वी, जल, तेज, वायु, आकाश – इन पाँच तत्त्वों से यह शरीर बना है । इसका Read more…

अनुलोम-विलोम प्राणायाम

अनुलोम-विलोम प्राणायाम इस प्राणायाम में सर्वप्रथम दोनों नथुनों से पूरा श्वास बाहर निकाल दें । इसके बाद दाहिने हाथ के अँगूठे से नाक के दाहिने नथुने को बन्द करके बाँए नथुने से सुखपूर्वक दीर्घ श्वास लें । अब यथाशक्ति श्वास को रोके रखें । फिर बाँए नथुने को मध्यमा अँगुली Read more…

सूर्यनमस्कार क्यों

क्यों करें सूर्य नमस्कार हमारे ऋषियों ने मंत्र और व्यायामसहित एक ऐसी प्रणाली विकसित की है जिसमें सूर्योपासना का समन्वय हो जाता है। इसे सूर्यनमस्कार कहते हैं। इसमें कुल 10 आसनों का समावेश है। हमारी शारीरिक शक्ति की उत्पत्ति, स्थिति एव वृद्धि सूर्य पर आधारित है। जो लोग सूर्यस्नान करते Read more…

ऊर्जायी प्राणायाम

ऊर्जायी प्राणायाम इसको करने से हमें विशेष ऊर्जा (शक्ति) मिलती है, इसलिए इसे ऊर्जायी प्राणायाम कहते हैं । विधि –  पद्मासन या सुखासन में बैठ कर गुदा का संकोचन करके मूलबंध लगाएं । फिर नथुनों, कंठ और छाती पर श्वास लेने का प्रभाव पड़े उस रीति से जल्दी श्वास लें । Read more…